लोकसभा में आज नक्सलवाद पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बहस का हिस्सा रहें। अपने संबोधन में उन्होंने कई बाड़ी बाते कहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई बदलाव आए। नक्सलवाद भी साल 2026 तक समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।
नई दिल्ली। लोकसभा में आज नक्सलवाद पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बहस का हिस्सा रहें। अपने संबोधन में उन्होंने कई बाड़ी बाते कहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई बदलाव आए। नक्सलवाद भी साल 2026 तक समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली। गृहमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से चाहता था कि उनकी स्थिति संसद में सामने आए, लेकिन लंबे समय तक इस पर गंभीर चर्चा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने वाम चरमपंथ की पूरी टाइमलाइन भी पेश की।
इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हों। हमारी सरकार किसी से बातचीत नहीं करना चाहती जो हथियार लेकर निर्दोषों पर हमला कर रहा है। जो हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया गया है। लेकिन जो हिंसा का रास्ता अपनाएंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद से न तो हथियार उठाने वालों को फायदा होता है, न ही आदिवासियों को और न ही सुरक्षाकर्मियों को। केवल शांति और विकास ही इस क्षेत्र की प्रगति का रास्ता है।
नक्सलवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने साफ-साफ कहा कि देश में वामपंथी उग्रवाद का मूल कारण विकास की कमी, गरीबी या अन्याय नहीं, बल्कि एक खास विचारधारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सल समस्या को हल करने के लिए मोदी सरकार विकास के साथ-साथ सख्त सुरक्षा नीति पर जोर दे रही है।