अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर अब बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। पाकिस्तान ने जहां इस बातचीत को लेकर जमकर तैयारी की है तो वहीं इसके होने पर ही अब संदेह पैदा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी कोई भी टीम पाकिस्तान नहीं पहुंची है।
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर अब बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। पाकिस्तान ने जहां इस बातचीत को लेकर जमकर तैयारी की है तो वहीं इसके होने पर ही अब संदेह पैदा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी कोई भी टीम पाकिस्तान नहीं पहुंची है। ईरान के सरकारी मीडिया ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है। ईरान की ओर से यह बयान आने के बाद से माना जा रहा है कि शायद ही अब कोई बातचीत होगी।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया गया कि विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ दोनों ही तेहरान में मौजूद हैं और अपने काम में लगे हुए हैं। ईरान का साफ कहना है कि फिलहाल कोई बातचीत नहीं होगी। एक सूत्र के मुताबिक, जब तक अमेरिका लेबनान में सीजफायर की शर्तों को पूरी तरह लागू नहीं करता और इजराइल हमले बंद नहीं करता, तब तक वार्ता ठप रहेगी। यह बयान ऐसे समय आई है जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया था कि ईरान की एक टीम इस्लामाबाद पहुंच गई है।
ईरान बोला- दोनों नेता अभी भी तेहरान में मौजूद
इस्लामाबाद में वार्ता शुरू होने से पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान ने उन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स को सख्ती से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद अध्यक्ष गलीबाफ अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों और सरकारी मीडिया ने स्पष्ट किया है कि ये सभी दावे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।
राज्य संचालित प्रसारक प्रेस टीवी ने तस्नीम समाचार एजेंसी के हवाले से बताया कि न तो विदेश मंत्री और न ही संसद अध्यक्ष देश से बाहर गए हैं। दोनों नेता अभी भी तेहरान में मौजूद हैं और राष्ट्रीय कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान में जारी सैन्य तनाव के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा में देरी हुई है। हालांकि पाकिस्तान और अमेरिका दोनों इस बैठक को सफल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी जटिल बने हुए हैं।
बातचीत पर पहले ही था संदेह
फार्स न्यूज एजेंसी ने भी यही रुख अपनाया और कहा कि लेबनान में युद्धविराम लागू हुए बिना अमेरिका के साथ कोई बातचीत संभव नहीं है। इस सीजफायर को लेकर सस्पेंस गुरुवार को ही पैदा हो गया था। तब पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि 10 सदस्यीय टीम इस्लामाबाद पहुंचेगी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना पोस्ट हटा लिया। इससे यह सवाल और गहरा गया कि आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है।
पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक प्रयास के तहत अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए। यहां वह ईरान के साथ शांति वार्ता का नेतृत्व करेंगे। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच घोषित अस्थायी सीजफायर बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक शनिवार को होनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेंस को यह जिम्मेदारी दी है, जबकि उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर भी इस मिशन में शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब युद्ध को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सीजफायर के बावजूद बढ़ा तनाव
हाल ही में घोषित अस्थायी सीजफायर के बाद भी हालात शांत नहीं हो सके हैं। ईरान और अमेरिका-इस्राइल समर्थित पक्षों के बीच समझौते की शर्तों को लेकर गहरा मतभेद सामने आया है। ईरान का कहना है कि सीजफायर में लेबनान में जारी संघर्ष भी शामिल होना चाहिए, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इस दावे को खारिज कर दिया है। इसके चलते क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की मांग की है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। ईरान ने पहले इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में इस मार्ग को सीमित कर दिया था।