महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले स्थित अंबरनाथ नगर पालिका में एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीति के विशेषज्ञों को चौंका दिया है। यहां एक दूसरे धुर विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने आपसी मतभेदों को दरकिनार करते हुए एक दुर्लभ गठबंधन बनाया है।
मुंबई। महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले स्थित अंबरनाथ नगर पालिका में एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीति के विशेषज्ञों को चौंका दिया है। यहां एक दूसरे धुर विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने आपसी मतभेदों को दरकिनार करते हुए एक दुर्लभ गठबंधन बनाया है। इस गठबंधन में अजित पवार (Ajit Pawar) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पार्षद भी शामिल हैं। ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ (Ambernath Vikas Aghadi) नाम से बने इस नए राजनीतिक मोर्चे ने नगर पालिका पर नियंत्रण हासिल कर लिया है और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया है। शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस गठबंधन को ‘अभद्र युति’ करार दिया है. यह गठबंधन शिंदे गुट को चुभने वाला साबित हुआ है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज महायुति में बीजेपी, अजित पवार (Ajit Pawar) और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) शामिल हैं।
पिछले माह संपन्न चुनावों में शिवसेना और भाजपा, राज्य और केंद्र में सहयोगी होने के बावजूद, अलग-अलग मैदान में उतरी थीं। 60 सदस्यीय नगर परिषद में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 27 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बावजूद वह बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई। भाजपा ने 14 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं, जबकि अजित पवार (Ajit Pawar) गुट की एनसीपी ने चार सीटों पर कब्जा जमाया। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुने गए। चुनाव के बाद अध्यक्ष पद के लिए हुए मुकाबले में शिवसेना को बड़ा झटका लगा। पार्टी की उम्मीदवार मनीषा वालेकर भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल से हार गईं। हालांकि भाजपा ने अध्यक्ष पद तो हासिल कर लिया, लेकिन उसके पास इतनी संख्या नहीं थी कि वह नगर पालिका का संचालन अकेले कर सके। नगर परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित कराने के लिए बहुमत जरूरी होता है, और इसी कमी को पूरा करने के लिए भाजपा ने स्थानीय स्तर पर अन्य दलों से बातचीत शुरू की।
इन चर्चाओं के बाद मंगलवार को अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया गया। इस गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। कुल मिलाकर गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई, जो 60 सदस्यीय परिषद में स्पष्ट बहुमत है। कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने भले ही कहा हो कि उन्हें औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन स्थानीय स्तर पर गठबंधन की घोषणा कर दी गई है। भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल को अघाड़ी का समूह नेता बनाया गया है। उनका कहना है कि भाजपा ने शिवसेना के लंबे शासन के दौरान फैले भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इस गठबंधन का मकसद नगर प्रशासन को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करना और अंबरनाथ के विकास को गति देना है।
वहीं शिवसेना ने इस गठबंधन की कड़ी आलोचना की है। पार्टी नेताओं ने इसे अनैतिक और अवसरवादी करार दिया है। अंबरनाथ से शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा एक ओर कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है और दूसरी ओर सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिला रही है। कांग्रेस के एक नेता ने सफाई देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में विकल्प सीमित थे और नगर के कामकाज को ठप होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया।
बीजेपी उपाध्यक्ष ने किया पलटवार
बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटील ने कहा कि अगर पिछले 25 सालों से भ्रष्टाचार करने वाले शिंदे गुट के साथ सत्ता में बैठे होते तो वही असली ‘अभद्र युति’ होती। उन्होंने यह भी कहा कि अंबरनाथ नगर परिषद के लिए शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ महायुति के संदर्भ में कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन उनके नेताओं की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।