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Bihar Makhana HS Code : बिहार के मखाना को मिला वैश्विक HS Code , दुनिया में मिलेगी पहचान

वैश्विक सुपरफूड (Global Superfood) के रूप में धूम मचाने वाले बिहार के मखाना को विशेष पहचान मिलेगी। मिथिलांचल क्षेत्र में खेती होने वाले मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खास एचएस कोड (HS Code)प्रदान किया गया है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Bihar Makhana HS Code :  वैश्विक सुपरफूड (Global Superfood) के रूप में धूम मचाने वाले बिहार के मखाना को विशेष पहचान मिलेगी। मिथिलांचल क्षेत्र में खेती होने वाले मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खास एचएस कोड (HS Code)प्रदान किया गया है। इस एचएस (हॉर्मोनाइज्ड सिस्टम) कोड के मिलने से मखाना को वैश्विक व्यापार मानकों के अनुरूप एक स्वतंत्र उत्पाद श्रेणी का दर्जा मिला है, जिससे इसके निर्यात, कर निर्धारण और प्रसंस्करण से जुड़े काम और अधिक सहज, पारदर्शी और औपचारिक बनेंगे। बिहार के दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिलों में मखाना न केवल कृषि उत्पाद है, बल्कि संस्कृति और पहचान का हिस्सा भी है। वर्षों से मखाना उत्पादक समुदाय इस प्रयास में लगे थे कि इसे दुनिया भर में अलग पहचान मिले — अब वह सपना साकार हो गया है। कम कैलोरी वाले स्नैक्स के लिए बढ़ती वैश्विक मांग के साथ, मखाना स्थानीय बाजारों से अंतरराष्ट्रीय अलमारियों तक छलांग लगाने के लिए तैयार है। मुख्य रूप से बिहार में उगाया जाता है, जो भारत के उत्पादन का 85 प्रतिशत हिस्सा है।

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एचएस कोड
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 अंकों का कोड होता है।
भारत में 8 अंकों का एचएस कोड उपयोग में लाया जाता है।
इससे सीमा शुल्क में पारदर्शिता, उत्पाद की स्वीकृति में तेजी और सरकारी लाभ योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है।

निर्यात में लंबी छलांग  
मखाना सही नीतियों के समर्थन से देश की अगली बड़ी निर्यात सफलता की कहानी बनने की राह पर है। मखाना उद्योग उल्लेखनीय वृद्धि देख रहा है, जो स्वस्थ, पौधे-आधारित स्नैक्स की बढ़ती वैश्विक मांग से प्रेरित है। मखाना निर्यात को बढ़ाना ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है।

1.मखाना अब अपने विशिष्ट कोड के साथ निर्यात हो सकेगा।
2.अंतरराष्ट्रीय बाजार में “मखाना” नाम से ही पहचान और स्वीकृति मिलेगी।
3.कस्टम क्लियरेंस, टैक्स वर्गीकरण, ई-कॉमर्स निर्यात, उद्यमिता में सरलता आएगी।
4.मखाना आधारित स्टार्टअप, प्रसंस्करण इकाइयों और एफपीओ को इससे सीधा लाभ होगा।
5.किसानों को अधिक दाम, मांग में वृद्धि और नई वैश्विक मंडियों तक पहुंच संभव होगी।

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