यूपी की राजधानी लखनऊ में रविवार को लोधी समाज ने विश्वेश्वरैया हाल में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय लोधी महासभा (अखिल भारतीय लोधा-लोधी-लोध महासभा) के तहत हुआ, जिसमें समाज ने अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया। सम्मेलन में बीजेपी से जुड़े कई प्रमुख लोधी नेता केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा,कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह अन्य दिग्गज जैसे विपिन कुमार वर्मा डेविड, टी. राजा सिंह आदि मौजूद रहे।
लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में रविवार को लोधी समाज ने विश्वेश्वरैया हाल में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय लोधी महासभा (अखिल भारतीय लोधा-लोधी-लोध महासभा) के तहत हुआ, जिसमें समाज ने अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया। सम्मेलन में बीजेपी से जुड़े कई प्रमुख लोधी नेता केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा,कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह अन्य दिग्गज जैसे विपिन कुमार वर्मा डेविड, टी. राजा सिंह आदि मौजूद रहे।
लखनऊ में लोधी समाज का शक्ति प्रदर्शन, बीजेपी की अंदरूनी कलह आई सामने।
बीजेपी में लोध बनाम कुर्मी की सियासी लड़ाई तेज, राजधानी में बड़ा जातिगत सम्मेलन।
विश्वेश्वरैया हाल में लोधी समाज का महासम्मेलन, मंत्री-विधायक रहे मौजूद।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में… pic.twitter.com/HJcBx19zoE— Roshan Kumar Journalist (@cameraman_r) February 8, 2026
यह आयोजन लोधी समाज की बड़ी संख्या में भागीदारी के साथ हुआ और इसे एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बीजेपी के भीतर चल रही जातिगत खींचतान (खासकर लोधी बनाम कुर्मी) से जुड़ा है। हाल ही में कुछ विवादों (जैसे बृजभूषण राजपूत और स्वतंत्र देव सिंह पटेल के बीच) के बाद यह सम्मेलन अंदरूनी असंतोष और जातिगत संतुलन का मंच बना। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सियासी संकेत बताया जा रहा है, जहां ओबीसी वोट बैंक में असंतोष की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों की माने तो लोधी समाज की एकजुटता से बीजेपी नेतृत्व की टेंशन बढ़ गई है। बीजेपी में अंदरूनी असंतोष खुलकर आया और जातिगत सम्मेलन मंच बना है। सियासी जानकार लोधी सम्मेलन को कुर्मी बनाम लोध राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर कार्रवाई के बाद लोधी समाज का बड़ा आयोजन हुआ है।
लोधी समाज के संगठनात्मक दम से बीजेपी के भीतर कुर्मी समाज में भी बेचैनी है और नोटिस की खबरें झूठी निकलीं है। यह सम्मेलन बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को बड़ा आईना दिखा दिया है। यह बीजेपी में बढ़ती जातिगत खींचतान, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत बीजेपी के लिए शुभ संकेत नहीं है।