एसआईटी की टीम बुधवार लगातार तीसरे दिन भी मंदिर परिसर पहुंची है। टीम दान काउंटर पर तैनात कर्मचारियों, बैंक कर्मियों व दान राशि की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी रही। जांच के दौरान पहले से चिन्हित आरोपियों से भी दोबारा सवाल-जवाब किए जाने की तैयारी है, ताकि उनके बयानों का मिलान उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा सके।
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गबन मामले को लेकर एसआईटी जांच पड़ताल में जुटी है। एसआईटी इस पूरे मामले की रिपोर्ट 15 दिनों में सौपेंगी। एसआईटी लगातार संदिग्धों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की छानबीन में जुटी है। इसके साथ ही, कई बातें सामने आ रही हैं। वहीं, अब जिन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं वो एक—एक कर सामने आ रहे हैं और खुद को बेकसूर बता रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दल के नेताओं के साथ ही आज जनता भी दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रही है।
एसआईटी की टीम बुधवार लगातार तीसरे दिन भी मंदिर परिसर पहुंची है। टीम दान काउंटर पर तैनात कर्मचारियों, बैंक कर्मियों व दान राशि की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी रही। जांच के दौरान पहले से चिन्हित आरोपियों से भी दोबारा सवाल-जवाब किए जाने की तैयारी है, ताकि उनके बयानों का मिलान उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा सके।
सूत्रों की माने तो, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई गई सीसीटीवी फुटेज भी जांच के केंद्र में है। एसआईटी अधिकारी फुटेज के आधार पर दान राशि के संग्रहण, गणना और जमा करने की प्रक्रिया का परीक्षण कर रहे हैं। मामले से जुड़े दस्तावेजों और कर्मचारियों के बयानों का भी मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
मंदिरों के प्रबंधन से अफसरों को करें बाहर: देवकी नंदन ठाकुर
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गबन मामले को लेकर अब साधु-संतों की तरफ से भी सवाल उठने लगे हैं। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने राम मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन और संचालन से सरकारी अफसरों को बाहर करने की मांग की है। साथ ही, सनातन बोर्ड का गठन करके इन मंदिरों का संचालन साधु-संत और सनातन के जानकारों को सौंपना चाहिए। ठाकुर ने कहा कि अगर राम मंदिर का प्रबंधन किसी सनानती के पास होता तो वह कभी चोरी नहीं करता, क्योंकि उसे धर्मग्रंथ के हवाले से पता होता कि मंदिर का धन चोरी करने पर 60 हजार साल तक मल के कीड़े के रूप में जन्म लेना होगा।