कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जाति जनगणना को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक विस्तृत टाइमलाइन जारी कर दावा किया कि सरकार अपने ही पुराने रुख से पलट गई है..
नई दिल्ली। कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जाति जनगणना को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक विस्तृत टाइमलाइन जारी कर दावा किया कि सरकार अपने ही पुराने रुख से पलट गई है।
जयराम रमेश का आरोप- “देश को गुमराह कर रहे PM”
जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार जाति जनगणना के मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकार ने इसे न करने का फैसला लिया और अब राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपना रुख बदल रही है। उन्होंने कहा कि यह “नीतिगत स्पष्टता की कमी” को दिखाता है। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में साल 2021 से 2026 तक की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने बताया कि जुलाई 2021 में लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया था कि SC/ST के अलावा अन्य जातियों की गिनती नहीं होगी। इसके बाद सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में भी यही रुख दोहराया गया। जयराम रमेश ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जाति जनगणना की मांग को लेकर “शहरी नक्सली मानसिकता” रखने का आरोप लगाया था। लेकिन अप्रैल 2025 में सरकार ने अचानक घोषणा कर दी कि आगामी जनगणना में जाति जनगणना भी शामिल होगी।
कानून में संशोधन को लेकर भी सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 से जुड़े अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा, जबकि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में अपने जातीय सर्वे पूरे कर लिए थे। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित कानून में बदलाव की कोशिश के पीछे “छिपा एजेंडा” यही है कि जाति जनगणना को टाला जा सके। जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक न्याय से जोड़कर देख रही है, वहीं बीजेपी पर आरोप लगा रही है कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मैदान तक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।