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Chaitra Navratri 2026 : इस साल चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी धरती लोक,जानें किस दिन पड़ेगी राम नवमी

मां दुर्गा की भक्ति और उपासना लिए चैत्र नवरात्रि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Chaitra Navratri 2026 : मां दुर्गा की भक्ति और उपासना लिए चैत्र नवरात्रि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान माता के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा को प्रसन्न करने और उनकी विशेषकुपा पाने के लिए भक्तगण व्रत उपवास का पालन करते है। इस बार  19 मार्च को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी। इसका समापन 27 मार्च को राम नवमी के दिन होगा।

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पौराणिक ग्रथों के अनुसार,इस बार मा दुर्गा पालकी पर सवार होकर धरती लोक पर आने वाली हैं। वहीं हाथी पर बैठकर माता प्रस्थान करेंगी। इस दौरान किए गए पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।

मान्यताओं के अनुसार, माता रानी का पालकी पर आने अर्थ ये है कि देश-दुनिया महामारी और बीमारी की चपेट में आ सकती है। माता का पालकी पर सवार होकर आना व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी यह शुभ नहीं रहता है।

चौमुखी दीया
नवरात्रि की रात को अगर मां दुर्गा के सामने शुद्ध देसी घी का चौमुखी दीया जलाएं और फिर इसी जलते दीये में 4 लौंग डाल दें तो धन संबंधी सभी समस्याओं का अंत हो जाएगा। इस टोटके को काफी कारगर माना जाता है।

पान के पत्ते
नवरात्रि की रात अगर पान के पत्ते और सिक्के को लाल कपड़े में बांधें और मां दुर्गा के आगे रख दें और फिर मातरानी को चढ़ाई गई इस पोटली को अगले दिन तिजोरी में अच्छी तरह रख दें। धन की समस्या आपके घर को छू भी नहीं पाएगी।

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नवरात्रि पहले दिन का मंत्र- मां शैलपुत्री
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।। पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्

नवरात्रि दूसरे दिन का मंत्र- मां ब्रह्मचारिणी
“या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

नवरात्रि तीसरे दिन का मंत्र-  मां चंद्रघंटा
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

नवरात्रि चौथे दिन का मंत्र- मां कूष्मांडा

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