1. हिन्दी समाचार
  2. क्षेत्रीय
  3. अब केंद्रीय विद्यालयों में आसानी से होगा गेस्ट टीचर्स के बच्चों का दाखिला, हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

अब केंद्रीय विद्यालयों में आसानी से होगा गेस्ट टीचर्स के बच्चों का दाखिला, हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

यह पूरा मामला हरियाणा के नूंह जिले का है, जहां एक सरकारी स्कूल में कार्यरत अतिथि शिक्षिका ने अपने बेटे का दाखिला नूंह स्थित केंद्रीय विद्यालय में कराने के लिए आवेदन किया था। जहां केंद्रीय विद्यालय प्रशासन ने उनके आवेदन को नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में मानने से मना कर दिया था। इसके बाद उस शिक्षिका ने सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

By Sushil Sah 
Updated Date

चंडीगढ़। केंद्रीय विद्यालय में बच्चों के दाखिले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूल में एडमिशन के उद्देश्य से अतिथि शिक्षकों को नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान ही समझा जाएगा और उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता।

पढ़ें :- गूगल मैप के कारण छुटी नीट परीक्षा, बाप बेटे परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए लगाते रहे गुहार

हाई कोर्ट का फैसला और टिप्पणी

एक अतिथि शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने यह आदेश दिया। अदालत के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं—

समानता का अधिकार

उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश के नियमों के तहत अतिथि शिक्षकों को नियमित राज्य सरकारी कर्मचारियों से अलग नहीं रखा जा सकता है।

पढ़ें :- मीनाक्षी नटराजन की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, दखल से किया इनकार

अधिनियम का हवाला

अदालत ने हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019 का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के तहत अतिथि शिक्षकों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा की सुरक्षा मिली हुई है और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह ही वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) भी मिलता है।

आवेदन खारिज करना गलत

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बच्चे के माता-पिता रेगुलर कर्मचारी न होकर गेस्ट टीचर हैं तो भी दाखिला फॉर्म रिजेक्ट नहीं किया जा सकता।

क्या था मामला?

पढ़ें :- IIMC exam script controversy: भारतीय जन संचार संस्थान का दावा, कहा- परीक्षा की लिपि तय करने का अधिकार सिर्फ हमारा

आपको बता दे कि यह पूरा मामला हरियाणा के नूंह जिले का है, जहां एक सरकारी स्कूल में कार्यरत अतिथि शिक्षिका ने अपने बेटे का दाखिला नूंह स्थित केंद्रीय विद्यालय में कराने के लिए आवेदन किया था। जहां केंद्रीय विद्यालय प्रशासन ने उनके आवेदन को नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में मानने से मना कर दिया था। इसके बाद उस शिक्षिका ने सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

फैसले का असर

हाई कोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता (Petitioner) के बेटे के दाखिले के आवेदन पर नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी के नियमों के तहत पुन: विचार करें।

प्राथमिकता का लाभ

इस फैसले के बाद अब हजारों अतिथि शिक्षकों के बच्चे भी केंद्रीय विद्यालय की एडमिशन गाइडलाइंस के तहत राज्य कर्मियों को मिलने वाली प्राथमिकता श्रेणी के दावेदार होंगे।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...