1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. कांग्रेस और सपा परिवारवाद की राजनीति का प्रतीक, एक मां-बेटा-बेटी तो दूसरा पति-पत्नी और चाचा-भतीजे की पार्टी : केशव मौर्य

कांग्रेस और सपा परिवारवाद की राजनीति का प्रतीक, एक मां-बेटा-बेटी तो दूसरा पति-पत्नी और चाचा-भतीजे की पार्टी : केशव मौर्य

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ये पार्टियां देश या प्रदेश का भला नहीं कर सकतीं, सिर्फ अपने परिवार का भला कर सकती हैं। यह लोकतंत्र की खूबसूरती पर एक धब्बा है।

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ये पार्टियां देश या प्रदेश का भला नहीं कर सकतीं, सिर्फ अपने परिवार का भला कर सकती हैं। यह लोकतंत्र की खूबसूरती पर एक धब्बा है। केशव मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, कांग्रेस और सपा: परिवारवाद की राजनीति का प्रतीक है। कांग्रेस: एक मां-बेटा-बेटी की पार्टी है तो सपा: एक पति-पत्नी-चाचा-भतीजे की पार्टी है। ये पार्टियां देश या प्रदेश का भला नहीं कर सकतीं, सिर्फ अपने परिवार का भला कर सकती हैं। यह लोकतंत्र की खूबसूरती पर एक धब्बा है।

पढ़ें :- Asian Games Update : शूटिंग में इलावेनिल, विदर्शा और सोनम की तिकड़ी ने भारत को दिलाया पहला मेडल, महिला हॉकी टीम ने उज़्बेकिस्तान को 19-0 से रौंदा

उन्होंने आगे लिखा, परिवारवाद को नकारो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को मज़बूत बनाओ। भारत मज़बूत होगा, हर परिवार का भविष्य सुरक्षित होगा। यही देश और देश के हर नागरिक के हित में है।

इसके साथ ही एक अन्य पोस्ट में उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और अपशब्दों का प्रयोग करने वाले यह भूल जाते हैं कि सभ्य समाज में उनकी कोई जगह नहीं है। यह उनकी मानसिकता और संस्कारों को आईना दिखाता है। अपनी विचारधारा और तर्क की कमजोरी छिपाने के लिए अपशब्दों का सहारा लेना, उनकी अपरिपक्वता और असभ्यता का प्रमाण है।

उन्होंने आगे कहा, परिवार डबलपमेंट एजेंसी के निदेशक खुद इस पर न ध्यान दे सकते हैं, न ही अपने समर्थकों को सभ्यता का पाठ पढ़ा सकते हैं। जब नेतृत्व स्वयं शालीनता से विमुख हो, तो समर्थकों से शिष्टाचार की उम्मीद कैसे की जाए? सच्चे नेता और विचारक तर्क-वितर्क और शालीन संवाद से बात करते हैं, न कि गाली-गलौज और अपशब्दों से। जो लोग अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि इससे उनकी छवि खराब होती है और वे अपनी विचारधारा की गंभीरता को भी खो देते हैं।

 

पढ़ें :- IND vs BAN Semi Final: कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर चुनी बल्लेबाजी, फाइनल में जगह पक्की करने उतरी टीम इंडिया

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...