कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले की आलोचना की। उन्होंने ख़ास तौर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उन बयानों को चुनौती दी, जिनमें उन्होंने टैक्स कम करने के लिए सरकार की कोशिशों का ज़िक्र किया था।
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले की आलोचना की। उन्होंने ख़ास तौर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उन बयानों को चुनौती दी, जिनमें उन्होंने टैक्स कम करने के लिए सरकार की कोशिशों का ज़िक्र किया था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इससे पहले इस फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा था कि सरकार ने भारतीय ग्राहकों को दुनिया भर में बढ़ रही एनर्जी की क़ीमतों से बचाने के लिए अपने ही फ़ाइनेंस पर बोझ उठाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की क़ीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की क़ीमतों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए तिवारी ने कहा कि मैंने हरदीप सिंह पुरी का बयान देखा है। सरकार को जो रेवेन्यू मिलता है, वह भी आम आदमी की जेब से ही आता है।
सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि लोग ही टैक्स देते हैं और इसी तरह सरकार को अपना रेवेन्यू मिलता है। इसलिए अगर सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की है, तो सरकार अपनी जेब से पैसे नहीं दे रही है। उन्होंने आगे उनकी आलोचना करते हुए कहा कि हरदीप सिंह पुरी का बयान ऐसा लगता है, जैसे वह अपनी जेब से पैसे निकालकर दे रहे हों। इसलिए अगर सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की है, तो इस बारे में इतना डींगें हांकने की क्या ज़रूरत है। तिवारी ने व्यापक भू-राजनीतिक और आर्थिक हालात, ख़ास तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर भी चिंता जताई। पश्चिम एशिया में हालात चार हफ़्ते के संघर्ष के बाद भी बहुत ही नाज़ुक बने हुए हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य अभी भी बंद है। उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराते खतरों को उजागर करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि खरीफ़ की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है। भारत अपने 49 प्रतिशत उर्वरक खासकर नाइट्रोजन-आधारित उर्वरक, फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। इसलिए यह सिर्फ़ कच्चा तेल और LNG का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की खाद्य सुरक्षा का भी मामला है। उन्होंने आने वाले महीनों के बारे में भी आगाह करते हुए कहा कि जब तक हम रबी के मौसम में पहुंचेंगे। उन्होने कहा कि क़तर जो दुनिया को लगभग 17 प्रतिशत उर्वरक की आपूर्ति करता है और उसने यूरिया का उत्पादन काफ़ी कम कर दिया है। इसका कारण है उसकी LNG सुविधाएं बंद हो जाना हैं।