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पश्चिम बंगाल में मर चुका है लोकतंत्र,भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राजभवन के बाहर दिया धरना

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव के बाद जगह-जगह हिंसा हुई है। इसके विरोध में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी (Leader of Opposition in West Bengal Assembly Shubhendu Adhikari) ने रविवार को राजभवन (Raj Bhavan) के बाहर धरना दिया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने टीएमसी (TMC) पर तमाम आरोप लगाए है।

By santosh singh 
Updated Date

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव के बाद जगह-जगह हिंसा हुई है। इसके विरोध में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी (Leader of Opposition in West Bengal Assembly Shubhendu Adhikari) ने रविवार को राजभवन (Raj Bhavan) के बाहर धरना दिया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने टीएमसी (TMC) पर तमाम आरोप लगाए है।

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शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र मर चुका है। हमने एक जन आंदोलन शुरू किया है। लगभग 50 लाख हिंदुओं को लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में वोट नहीं डालने दिया गया। वहीं राज्य में हुए विधानसभा के चार उपचुनावों में दो लाख से अधिक हिंदुओं को मतदान करने की अनुमति नहीं दी गई। हम एक पोर्टल शुरू कर रहे हैं। जिनको वोट नहीं डालने दिया गया वे लोग पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं। उनकी पूरी गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

प्रदर्शन में अधिकारी समेत तापस रॉय, रुद्रनील घोष और अन्य ने भगवा पार्टी के 300 कार्यकर्ता मौजूद रहे। आपको बता दें कि शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर चुनाव के बाद हिंसा का आरोप लगाया था। उन्होंने अदालत से निवेदन किया था कि हिंसा के विरोध में राजभवन के बाहर धरना देने की अनुमति दी जाए। अधिकारी ने यह भी कहा था कि उसी जगह पर धरना देने की अनुमति दी जाए जहां, तृणमूल कांग्रेस (TMC)  ने अक्तूबर 2023 में प्रदर्शन किया था।

इस पर हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने भाजपा नेता को 14 जुलाई को चार घंटे के लिए धरना देने की अनुमति दी थी। अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि धरना प्रदर्शन में 300 से अधिक लोगों को शामिल न किया जाए। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि धरना प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति हथियार के साथ नहीं पहुंचेगा। साथ ही ऐसा कोई भाषण नहीं दिया जाएगा, जिसे सुनकर लोगों में आक्रोश पैदा हो।

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