यूपी देश के कई राज्यों में एसआईआर का काम चल रहा है। इसके तहत राज्यों से लाखों की संख्या में फर्जी नाम और डुप्लीकेट वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं। बंगाल में एसआईआर के बाद 58 लाख लोगों के नाम कटना तय हुआ है। ऐसे ही आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। अब इसी मामले में पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने SIR पर बड़ा बयान दिया है।
कन्नौज। यूपी देश के कई राज्यों में एसआईआर का काम चल रहा है। इसके तहत राज्यों से लाखों की संख्या में फर्जी नाम और डुप्लीकेट वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं। बंगाल में एसआईआर के बाद 58 लाख लोगों के नाम कटना तय हुआ है। ऐसे ही आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। अब इसी मामले में पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने SIR पर बड़ा बयान दिया है।
कन्नौज से पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने बीते लोकसभा चुनाव में मिली हार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम लोगों ने SIR पर सही से दिया ध्यान तो समाजवादी पार्टी दूरबीन लेकर भी ढूंढने को नहीं मिलेगी। कन्नौज में लगभग 3 लाख वोट कटने जा रहे हैं। ये वोट बीजेपी के नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है अखिलेश यादव को कन्नौज में इतने वोटों से जीत कैसे मिली है?
कन्नौज के पूर्व भाजपाई सांसद का बयान बेहद आपत्तिजनक है, चुनाव आयोग तत्काल संज्ञान ले : अखिलेश यादव
वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि कन्नौज के पूर्व भाजपाई सांसद का बयान बेहद आपत्तिजनक है, क्या वो जायज़ वोटों को कटवाने की सलाह दे रहे हैं। चुनाव आयोग तत्काल संज्ञान ले।
कन्नौज के पूर्व भाजपाई सांसद का बयान बेहद आपत्तिजनक है, क्या वो जायज़ वोटों को कटवाने की सलाह दे रहे हैं। चुनाव आयोग तत्काल संज्ञान ले।
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काले कारनामों का काला चश्मा लगाए, ये महानुभाव बोलते समय भूल गये कि ये जो कह रहे हैं वो उन्हीं के दल के भाजपाई मुख्यमंत्री जी से उल्टी बात है।… pic.twitter.com/5phzh4GpRv
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 17, 2025
अखिलेश यादव ने कहा कि काले कारनामों का काला चश्मा लगाए, ये महानुभाव बोलते समय भूल गये कि ये जो कह रहे हैं वो उन्हीं के दल के भाजपाई मुख्यमंत्री जी से उल्टी बात है। माननीय मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में जैसे ही ये बात आएगी वो इनकी क्लास लगा देंगे… और उनसे बच गये तो दूर बैठे दूरबीन वाले इनको बुला लेंगे क्योंकि दूरबीन का इस्तेमाल करने के डॉयलॉग पर उनका एकाधिकार है। अब ये बेचारे भागे-भागे फिरेंगे कि किस-किस से बचें… चुनाव आयोग से, लखनऊवालों से या दिल्लीवाले ‘द्वितीय’ से।