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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई? कॉकरोच को 5 लाख की मिली नोटिस देख भड़के CJI

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अधिकारी की कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की हिम्मत कैसे हुई? साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब भी मांगा है। खबर है कि छात्र राजधानी दिल्ली में हुए जंतर मंतर प्रोटेस्ट (Jantar Mantar Protest) में गया था, जिसके बाद उसे नोटिस मिला है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अधिकारी की कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की हिम्मत कैसे हुई? साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब भी मांगा है। खबर है कि छात्र राजधानी दिल्ली में हुए जंतर मंतर प्रोटेस्ट (Jantar Mantar Protest) में गया था, जिसके बाद उसे नोटिस मिला है।

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20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नाराजगी जाहिर की थी और किसी भी तरह का ऐक्शन लेने पर रोक लगा दी थी।

लाइव लॉ के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने बुधवार को नोएडा एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Noida Executive Magistrate) की तरफ से की गई कार्रवाई पर जमकर नाराज हुए। उन्होंने कहा कि कैसे किसी मजिस्ट्रेट की आदेश जारी करने की हिम्मत हो गई? हमने साफ-साफ कह दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’ खबर है कि अधिकारी को कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा।

क्या था मामला?

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के एक छात्र को पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का आरोप है कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट में जाने के लिए तैयार किया था। हालांकि, बाद में नोटिस को वापस ले लिया दया था। यह नोटिस शांति बंधपत्र नोटिस था। छात्र अक्षत त्रिपाठी (Student Akshat Tripathi) ने हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से भाग लिया था और उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था।

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क्या होता है शांति बंधपत्र नोटिस?

पीटीआई भाषा के अनुसार, ‘शांति बंधपत्र नोटिस’ (Peace Bond Notice) कोई सजा या किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं होता है। यह एक एहतियाती कदम होता है, जिसके तहत प्रशासन किसी व्यक्ति से यह आश्वासन लेने के लिए आर्थिक बंधपत्र भरवा सकता है कि वह शांति बनाए रखेगा और ऐसी गतिविधियों से दूर रहेगा, जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

एजेंसी के मुताबिक, यह नोटिस चार सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय (Greater Noida Commissionerate) के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से धारा 126 और 135 के तहत शुरू की गई कार्यवाही के बाद की गई। नोटिस में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

जंतर मंतर पर प्रदर्श के कुछ दिनों बाद ही सरकार ने सीजेपी (CJP) के बैनर तले आंदोलन कर रही जनता की शर्तों को मान लिया था और शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को हटा दिया गया था। बाद में प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) को इस पद पर नियुक्त किया गया था। उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Social activist Sonam Wangchuk) करीब 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर थे। सीजेपी (CJP)  ने इस्तीफे के अलावा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और केस वापस लेने की मांग की थी।

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