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लखनऊ में बैंककर्मी की सूझबूझ से टली रिटायर इंस्पेक्टर से 80 लाख की ठगी, साइबर ठगों ने ढाई घंटे किया था ‘डिजिटल अरेस्ट’

यूपी (UP) की राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों (Cyber ​​Fraudsters) ने नगर निगम के रिटायर इंस्पेक्टर को टेरर फंडिंग का डर दिखाकर करीब ढाई घंटे डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) रखा। जालसाजों ने खुद को डीआईजी (DIG) और एटीएस पुणे (ATS Pune) का इंस्पेक्टर बताकर वीडियो कॉल किया।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ : यूपी (UP) की राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों (Cyber ​​Fraudsters) ने नगर निगम के रिटायर इंस्पेक्टर को टेरर फंडिंग का डर दिखाकर करीब ढाई घंटे डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) रखा। जालसाजों ने खुद को डीआईजी (DIG) और एटीएस पुणे (ATS Pune) का इंस्पेक्टर बताकर वीडियो कॉल किया।

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पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) में 40 लाख रुपए की फंडिंग करने की बात कहते हुए जेल भेजने की धमकी दी। डर की वजह से रिटायर इंस्पेक्टर अपने खातों और एफडी से करीब 80 लाख रुपए निकालने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के गोमती नगर शाखा (Bank of Maharashtra branch in Gomti Nagar) पहुंचे। बैंक स्टाफ की सतर्कता से वह ठगी का शिकार होने से बच गए।

एटीएस का इंस्पेक्टर बनकर कॉल किया

गोमतीनगर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा (Bank of Maharashtra branch in Gomti Nagar) है। बैंक के विधि अधिकारी मनीष सिंह (Bank legal officer Manish Singh) के मुताबिक, मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले आशियाना निवासी रिटायर इंस्पेक्टर छेदीलाल (Chedilal) बैंक के पुराने ग्राहक हैं। 6 फरवरी की सुबह उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS), पुणे का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार (Pune Inspector Ranjit Kumar) बताया।

उसने कहा कि उनके आधार कार्ड से खुले कुछ बैंक खातों से पहलगाम आतंकी हमले में 40 लाख रुपये की टेरर फंडिंग हुई है। जांच चल रही है। उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। वह किसी को भी इसकी जानकारी नहीं देंगे। छेदीलाल ने कहा कि वह बैंक पहुंच रहे हैं। बाद में बात करेंगे। इसके बाद कॉल कट गई।

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कुछ ही देर में वीडियो कॉल आया

छेदीलाल के फोन काटने के कुछ ही मिनट बाद जालसाजों ने वीडियो कॉल किया। इस बार कॉल पर खुद को डीआईजी एटीएस बताने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आया। उसने छेदीलाल से उनके बैंक खातों, एफडी और जमा रकम की पूरी जानकारी ली।

उसके बाद कहा कि जांच के लिए बताए जा रहे खातों में तुरंत सारी रकम ट्रांसफर करनी होगी। इसके बाद कॉल तीसरे व्यक्ति को दे दी गई। वह भी वर्दी में था और लगातार रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बना रहा था।

बैंक पहुंचे छेदीलाल को आया पसीना

जेल जाने के डर से घबराए छेदीलाल सुबह करीब 11 बजे बैंक पहुंचे। वहां एक कोने में बैठ गए। वह खातों और एफडी से करीब 80 लाख रुपये निकालने की योजना बना रहे थे। जालसाजों ने 10 मिनट बाद फिर कॉल करने की बात कही थी। इसी दौरान सर्दी के मौसम में भी उनके माथे पर पसीना देख बैंक के दफ्तरी राजकुमार को शक हुआ।

राजकुमार ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन छेदीलाल कुछ भी बताने से इनकार करते रहे। इसके बाद उसने पूरे मामले की जानकारी विधि अधिकारी मनीष सिंह को दी। मनीष सिंह छेदीलाल के पास पहुंचे। वह उनके पुराने ग्राहक थे, इसलिए पहले समझाया। कुछ देर बाद छेदीलाल ने पूरी आपबीती बता दी।

ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत

इसी बीच जालसाजों की फिर वीडियो कॉल आया। मनीष सिंह ने फोन अपने हाथ में लिया और दूसरी ओर मौजूद वर्दीधारी जालसाजों को जमकर फटकार लगाई। पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने की बात कहते ही जालसाजों ने फोन काट दिया। उसके बाद संपर्क नहीं किया। इसके बाद बैंक की ओर से ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई।

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