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Reels बनाते समय डगमगा गई नाव, डूब गए 11वीं के चार छात्र, ट्यूशन के बहाने घर से निकले थे

झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव स्थित रेलवे डैम में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। 11वीं के चार दोस्त नाव पलटने से डैम में डूब गए। इस हादसे में दो छात्रों को बचा लिया गया, एक का शव बरामद हो चुका है, जबकि एक छात्र अभी भी लापता है...

By हर्ष गौतम 
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उत्तर प्रदेश, पर्दाफाश।  झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव स्थित रेलवे डैम में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। 11वीं के चार दोस्त नाव पलटने से डैम में डूब गए। इस हादसे में दो छात्रों को बचा लिया गया, एक का शव बरामद हो चुका है, जबकि एक छात्र अभी भी लापता है। चारों छात्र—श्रवण तिवारी (19), शौर्य (18), वेदांश यादव (18) और आतिफ मंसूरी (19)—माउंट लिट्रा जी स्कूल के छात्र थे। परीक्षा खत्म होने के बाद रविवार को ये ट्यूशन जाने के लिए घर से निकले, लेकिन रास्ते में ही प्लान बदलकर बाइक से डैम पहुंच गए।

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डैम के किनारे पड़ी एक नाव लेकर चारों पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छात्र बीच डैम में खड़े होकर मोबाइल से रील बना रहे थे। इसी दौरान अचानक नाव असंतुलित होकर पलट गई और चारों गहरे पानी में गिर गए। डैम में जहां हादसा हुआ, वहां करीब 30 फीट गहराई बताई जा रही है।

हादसे के वक्त पास में बकरियां चरा रहे कल्लू केवट ने असाधारण साहस दिखाया। जैसे ही उसने बच्चों को डूबते देखा, वह तुरंत पानी में कूद पड़ा और श्रवण तिवारी व शौर्य को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, वेदांश यादव और आतिफ मंसूरी गहरे पानी में समा गए। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अंधेरा होने के कारण रात में अभियान रोकना पड़ा।

सोमवार सुबह दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। स्थानीय गोताखोरों की मदद से करीब 15 घंटे बाद सुबह 9 बजे आतिफ मंसूरी का शव बरामद कर लिया गया। वहीं, वेदांश यादव की तलाश अभी भी जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जालौन से एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई है और लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।

एसडीएम गोपेश तिवारी ने बताया कि चार बच्चों के डूबने की सूचना पर तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया था। दो को सुरक्षित बचा लिया गया, एक का शव बरामद हुआ है और एक की तलाश जारी है। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आतिफ मंसूरी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता रेलवे में ठेके पर काम करते हैं। वहीं, वेदांश यादव भी अपने परिवार का इकलौता बेटा है, जिसकी एक बड़ी बहन है। इस दर्दनाक हादसे के बीच कल्लू केवट की बहादुरी की हर तरफ चर्चा हो रही है, जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर दो जिंदगियां बचा लीं।

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