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12 जून, 2021 शनिवार का पंचांग: आज द्वितीया तिथि जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

पंचांग से आपको सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू मास एवं पक्ष आदि की जानकारी मिलती है। दैनिक हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि दिन है। आज सूर्य वृषभ राशि में रहेंगे और चन्द्रमा मिथुन राशि में संचरण करेंगे।

By प्रीति कुमारी 
Updated Date

आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि दिन है। आज सूर्य वृषभ राशि में रहेंगे और चन्द्रमा मिथुन राशि में संचरण करेंगे। आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि दिन है। हिन्दू काल गणना के अनुसार ‘चन्द्र रेखांक’ को ‘सूर्य रेखांक’ से 12 अंश ऊपर जाने के लिए जो समय लगता है, वह तिथि कहलाती है। एक माह में तीस तिथियां होती हैं और ये तिथियां दो पक्षों में विभाजित होती हैं। शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है। तिथि के नाम – प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा।

पढ़ें :- आज का पंचांग : पंचांग • शुक्रवार, 20 अगस्त, 2021
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पंचांग 12 जून 2021 , शनिवार

विक्रम संवत – 2078, आनन्द
शक सम्वत – 1943, प्लव
पूर्णिमांत – ज्येष्ठ
अमांत – बैशाख

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ शुक

पक्ष द्वितीया तिथि दिन है. सूर्य वृषभ राशि में रहेंगे और चन्द्रमा मिथुन राशि में संचरण करेंगे.

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आज का पंचांग

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष वितीया
नक्षत्र: आद्रा

आज का दिशाशूल:पूर्व दिशा ।
आज का राहुकाल: 9:05 AM – 10:46 AM

सूर्य और चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 5:44 AM
सूर्यास्त – 7:08 PM
चन्द्रोदय – Jun 12 6:57 A

पढ़ें :- पंचांग • मंगलवार, 17 अगस्त, 2021

चन्द्रास्त – Jun 12 9:01 PM

शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त – 11:59 AM – 12:53 PM
अमृत काल – 05:56 AM – 07:42 AM
ब्रह्म मुहूर्त – 04:08 AM – 04:56 AM

वार: वार का आशय दिन से है। एक सप्ताह में सात वार होते हैं। ये सात वार ग्रहों के नाम से रखे गए हैं – सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

करण: एक तिथि में दो करण होते हैं। एक तिथि के पूर्वार्ध में और एक तिथि के उत्तरार्ध में। ऐसे कुल 11 करण होते हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं – बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा कहते हैं और भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।

 

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