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15 दिन बाद खत्म खत्म हुआ केन-बेतवा प्रोजेक्ट का आंदोलन, सुबह-सुबह पुलिस पहुंची और प्रदर्शन स्थल कराया खाली

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना और उससे जुड़े पुनर्वास के मुद्दे को लेकर पिछले 15 दिनों से चल रहा आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया। सुबह तड़के पुलिस और प्रशासन की टीम कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बने धरना स्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर बसों के जरिए उनके गांवों के लिए रवाना कर दिया...

By Harsh 
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छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना और उससे जुड़े पुनर्वास के मुद्दे को लेकर पिछले 15 दिनों से चल रहा आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया। सुबह तड़के पुलिस और प्रशासन की टीम कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बने धरना स्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर बसों के जरिए उनके गांवों के लिए रवाना कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारियों के अपने-अपने दावे हैं।

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सुबह पांच बजे पहुंची पुलिस, आंदोलनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप

आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार का कहना है कि रविवार सुबह करीब पांच बजे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी धरना स्थल पर पहुंचे। उनका आरोप है कि मीडिया के पहुंचने से पहले ही आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और विस्थापन से जुड़े सवालों को दबाने के लिए की गई।

प्रशासन बोला- गिरफ्तारी नहीं, लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा

वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने हिरासत या गिरफ्तारी की बात से इनकार किया। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर बढ़ रहा था और धरना स्थल सुरक्षित नहीं रह गया था। इसी वजह से लोगों को समझाकर बसों में बैठाया गया और उनके गांव भेज दिया गया। प्रशासन के मुताबिक, डॉक्टरों की टीम भी मौके पर मौजूद थी, जिसने प्रदर्शनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

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महिलाओं ने संभाली थी आंदोलन की कमान

यह विरोध प्रदर्शन 3 जुलाई से जारी था और इसकी अगुवाई बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं कर रही थीं। आंदोलन के दौरान जल सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाए गए। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे और विस्थापित परिवारों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे थे।

विस्थापन और पुनर्वास बना सबसे बड़ा मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के अलावा मझगांव और रुंज सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला है। उनका आरोप है कि कई लोगों की जमीन, जंगल, पानी के स्रोत और आजीविका छिन गई, जबकि प्रशासन ने उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया।

अमित भटनागर का कहना था कि प्रभावित परिवारों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए, जबरन बेदखली की गई, बिजली कनेक्शन काटे गए और कुछ स्थानों पर स्कूल तक तोड़ दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन की ओर से किए गए कई वादे आज तक पूरे नहीं हुए।

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प्रभावित परिवारों ने रखीं ये मांगें

आंदोलनकारियों की मांग थी कि प्रभावित परिवारों की पूरी सूची प्रत्येक गांव में सार्वजनिक की जाए, पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और ग्रामीणों पर किसी तरह का दबाव या डर का माहौल न बनाया जाए।

सरकार ने आरोपों को किया खारिज

प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय महत्व की योजना है, जिसे सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लागू किया जा रहा है। उनका दावा है कि इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी, पेयजल संकट कम होगा और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

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