महाराष्ट्र सरकार की चर्चित ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना’ में बड़े स्तर पर छंटनी की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू की गई इस योजना में सख्त सत्यापन अभियान के बाद 54 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब सिर्फ 1.89 करोड़ महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा...
Mumbai: महाराष्ट्र सरकार की चर्चित ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना’ में बड़े स्तर पर छंटनी की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू की गई इस योजना में सख्त सत्यापन अभियान के बाद 54 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब सिर्फ 1.89 करोड़ महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। इससे पहले इस योजना के लिए 2.43 करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने पंजीकरण कराया था। ई-केवाईसी और दस्तावेजों की जांच के बाद बड़ी संख्या में नाम सूची से बाहर कर दिए गए।
ई-केवाईसी के बाद सामने आई असली तस्वीर
राज्य सरकार ने सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी यानी इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर प्रक्रिया अनिवार्य की थी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं तक पहुंचे जो वास्तव में आर्थिक रूप से जरूरतमंद हैं। तीन बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद लाखों महिलाएं 30 अप्रैल की अंतिम तारीख तक अपना सत्यापन पूरा नहीं कर सकीं। इसके बाद सरकार ने अंतिम सूची जारी करते हुए बड़ी संख्या में लाभार्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया।
आय सीमा से ज्यादा होने पर कटे नाम
यह योजना खासतौर पर उन परिवारों के लिए बनाई गई है जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है। जांच के दौरान पता चला कि कई महिलाओं के परिवार इस आय सीमा से ऊपर थे, फिर भी वे योजना का लाभ ले रही थीं। इतना ही नहीं, कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें महिलाओं के परिवार के सदस्य सरकारी नौकरी में थे या स्वयं लाभार्थी महिला सरकारी कर्मचारी थी। नियमों के अनुसार ऐसे लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता।
तकनीकी गलती भी बनी वजह
कुछ महिलाओं को तकनीकी कारणों से भी अपात्र घोषित कर दिया गया। कई आवेदनों में गलत जानकारी दर्ज हो गई थी। उदाहरण के तौर पर, कुछ महिलाओं ने पंजीकरण के दौरान गलती से खुद को सरकारी कर्मचारी के रूप में दर्ज कर दिया, जिससे उनका आवेदन स्वतः संदिग्ध श्रेणी में चला गया। ऐसे मामलों में सरकार ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन के दौरान मिली त्रुटियों के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया गया है।
पात्र महिलाओं को मिलते रहेंगे 1500 रुपये
सरकार ने साफ किया है कि जिन महिलाओं के नाम अंतिम पात्र सूची में शामिल हैं, उन्हें हर महीने 1,500 रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती रहेगी। वहीं जिन महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है, उनकी आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। गंभीर धोखाधड़ी वाले मामलों में सरकार पहले से दी गई राशि की वसूली भी कर रही है।
योजना की पारदर्शिता पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि योजना को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। ताकि सरकारी सहायता सही लोगों तक पहुंचे और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाई जा सकेमाझी लाड़की बहिन योजना महाराष्ट्र की सबसे चर्चित सामाजिक योजनाओं में से एक है, इसलिए इस बड़े सत्यापन अभियान ने राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल बढ़ा दी है।