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Parliament Monsoon Session 2026 : मायावती ने पूछा- क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन की भेंट चढ़ जायेगा

Parliament Monsoon Session : संसद के मॉनसून सत्र कल से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। इसके शुरू होने से पहले सरकार ने आज सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक के दौरान, सरकार संसद के दोनों सदनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगेगी। सत्र के दौरान, कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उनके पारित होने की संभावना है। इस बीच, बसपा सुप्रीमो मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष से सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए गंभीरता दिखाने की अपील की है।

By Abhimanyu 
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Parliament Monsoon Session : संसद के मॉनसून सत्र कल से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। इसके शुरू होने से पहले सरकार ने आज सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक के दौरान, सरकार संसद के दोनों सदनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगेगी। सत्र के दौरान, कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उनके पारित होने की संभावना है। इस बीच, बसपा सुप्रीमो मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष से सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए गंभीरता दिखाने की अपील की है।

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मॉनसून सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, “अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।” उन्होंने आगे कहा, “वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।”

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मायावती ने कहा, “इतना ही नहीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही, भारत की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।”

सत्ता और विपक्ष से अपील करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा, “अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है। साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें। इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।”

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