Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 : केंद्र की मोदी सरकार ने 16-18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। जिसका मुख्य उद्देश्य 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के कार्यान्वयन और विधायी निकायों में 33% आरक्षण पर चर्चा करना है। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने लोकसभा चुनाव 2024, उसके बाद के संपन्न हुए विधानसभा चुनावों और मौजूदा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 : केंद्र की मोदी सरकार ने 16-18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। जिसका मुख्य उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) के कार्यान्वयन और विधायी निकायों में 33% आरक्षण पर चर्चा करना है। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने लोकसभा चुनाव 2024, उसके बाद के संपन्न हुए विधानसभा चुनावों और मौजूदा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को एक्स पोस्ट में लिखा, ‘सितंबर 2023 में बिल के ऐतिहासिक रूप से पास होने के बावजूद, लोकसभा चुनावों में कोई भी पार्टी 33 प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारने के लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुँच पाई; क्षेत्रीय पार्टियों ने 14.4 प्रतिशत और राष्ट्रीय पार्टियों ने 11.8 प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारे। इसके अलावा, लगभग 150 लोकसभा सीटों (जो कुल सीटों का लगभग 27.6% हैं) पर तो एक भी महिला उम्मीदवार नहीं थी। हाल ही में जारी ADR की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे देश में 4,666 सांसदों/विधायकों में से केवल 464 (यानी 10%) ही महिलाएँ हैं। इनमें 18वीं लोकसभा के 543 सांसदों में से 74 (14%) और 4,123 विधायकों में से 390 (9%) महिलाएँ शामिल हैं।’
मौजूदा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने लिखा, ‘केरल, तमिलनाडु (TN) और पश्चिम बंगाल (WB) जैसे राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। केरल की 140 विधानसभा सीटों में से प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने बहुत ही सीमित संख्या में महिला उम्मीदवार उतारे हैं—CPI(M) ने 12, कांग्रेस ने 9, BJP ने 14 और CPI ने 5। वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने अपने इतिहास में पहली बार महिला उम्मीदवारों को दो सीटें दी हैं। पश्चिम बंगाल में, तृणमूल कांग्रेस ने अपने 291 उम्मीदवारों की सूची में 52 महिला उम्मीदवारों को जगह दी है। तमिलनाडु में, DMK ने अपनी 164 सीटों में से 18 सीटें महिलाओं को दी हैं, जबकि AIADMK ने अपनी 167 सीटों में से 20 सीटें महिलाओं को दी हैं। यहाँ भी, देश की महिलाओं से किए गए वादे के अनुसार 33% के आँकड़े के करीब कोई भी पार्टी नहीं पहुँच पाई है।’
Despite the support in the historic passing of the bill in September 2023, none of the parties in the Lok Sabha elections came anywhere close to fielding 33 percent women candidates with regional parties fielding 14.4 percent of candidates and national parties 11.8 percent women…
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 13, 2026
पढ़ें :- देहरादून में मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड आर्मी ब्रिगेडियर की गोली मारकर हत्या, दो पक्षों के बीच गोलीबारी में गयी जान
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन, 2023) को संसद से पारित कराया था। जिसका सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों ने समर्थन दिया था। यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का एक ऐतिहासिक कानून है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य राजनीतिक सशक्तिकरण के माध्यम से निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। यह आरक्षण परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होगा।