घाघरा नदी (Ghaghra River) पर संजय सेतु के निर्माण की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता संजीव सिंह राठौर ने अपने साथियों के साथ नदी किनारे प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जर्जर पुल के कारण ग्रामीणों को हो रही परेशानियों को उजागर किया।
लखनऊ/बहराइच। घाघरा नदी (Ghaghra River) पर संजय सेतु के निर्माण की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता संजीव सिंह राठौर ने अपने साथियों के साथ नदी किनारे प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जर्जर पुल के कारण ग्रामीणों को हो रही परेशानियों को उजागर किया।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था, “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।” सिस्टम से अपील है- संजय सेतु घाघरा पुल का निमार्ण शीघ्र हो। इस प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कागजों में विकास के दावे चाहे जितने भी हों, जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल अलग है।
वर्षों से प्रस्तावित संजय सेतु (घाघरा पुल) का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। यह पुल घाघरा घाट पर स्थित है और इसकी खराब हालत चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के जर्जर होने से आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हैं। अक्सर जाम के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। मनोज यादव ने कहा कि इस पुल से गुजरते समय लोग ईश्वर को याद करें, ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित रहे।
प्रदर्शनकारियों ने शासन से तत्काल संजय सेतु का निर्माण कार्य शुरू करने की अपील की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। मौके पर अमर सिंह तरुण, मनोज यादव, रुपेश गुप्ता सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।