टीम इंडिया (Team India) के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह (Rinku Singh) को टी-20 वर्ल्डकप छोड़कर वापस देश लौटना पड़ा है। उनके पिता खानचंद्र सिंह (Father Khanchand Singh) को लिवर कैंसर (Liver Cancer) की वजह से नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।
नई दिल्ली। टीम इंडिया (Team India) के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह (Rinku Singh) को टी-20 वर्ल्डकप छोड़कर वापस देश लौटना पड़ा है। उनके पिता खानचंद्र सिंह (Father Khanchand Singh) को लिवर कैंसर (Liver Cancer) की वजह से नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। सिंह को स्टेज-4 कैंसर डिटेक्ट हुआ है। साथ ही उनको कुछ और गंभीर दिक्कतों के चलते वेंटिलेटर सपोर्ट (Ventilator Support) पर भी रखा गया है। अब रिंकू सिंह (Rinku Singh) के वापस वर्ल्डकप मैचों में मैदान पर लौटने की संभावना इसी पर निर्भर है कि क्या उनके पिता इस बीमारी से रिकवर हो पाएंगे? स्टेज-4 में पहुंचे लिवर कैंसर (Liver Cancer) से बचने की कितनी उम्मीदें हैं?
आइए इस बारे में दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (Delhi State Cancer Institute) में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की हेड डॉ. प्रज्ञा शुक्ला (Dr. Pragya Shukla, Head of Oncology) से जानते हैं? डॉ. प्रज्ञा शुक्ला (Dr. Pragya Shukla) ने बताया कि रिंकू सिंह (Rinku Singh) के पिता के स्टेज-4 लिवर कैंसर को लेकर अभी यह साफ नहीं है कि यह मेटास्टेसिस डिजीज है यानि लिवर में शरीर की किसी अन्य जगह से आई है या लिवर के अंदर ही पैदा हुआ कैंसर है? यानि इस कैंसर का प्राइमरी सोर्स क्या है, यह पता होना जरूरी है लेकिन आमतौर पर देखा जाता है कि लिवर कैंसर की चौथी स्टेज पर पहुंच चुके मरीजों के ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि खानचंद्र सिंह (Khanchand Singh) वेंटिलेटर सपोर्ट (Ventilator Support) पर हैं तो इससे संभावना पैदा होती है कि सिर्फ लिवर कैंसर (Liver Cancer) ही नहीं उनके अन्य ऑर्गन भी ठीक से फंक्शन नहीं कर पा रहे हैं। लिहाजा यह क्रिटिकल कंडीशन तो है और इस स्थिति में मरीज के सही होने की उम्मीद कम होती है।
डॉ. शुक्ला आगे बताती हैं कि लिवर कैंसर के मरीजों में प्राइमरी सोर्स का पता चलने के बाद यह भी देखा जाता है कि उनका कितना लिवर इसमें अफेक्टेड है। अगर लिवर का इन्वॉल्वमेंट कम होता है तो स्टीरियोटेक्टिव बॉडी रेडिएशन थेरेपी के माध्यम से इलाज कर ठीक किया जाता है। अगर लिवर के थोड़े हिस्से में कैंसर सेल्स हैं तो लिवर रिसेक्शन करके लिवर के उस हिस्से को निकाल सकते हैं, लेकिन ये तभी संभव है जब आपके लिवर की फंक्शनिंग बहुत बुरी तरह प्रभावित न हुई और लिवर का थोड़ा हिस्सा ही इसमें शामिल हो। समझने वाली बात है कि हर स्टेज-4 लिवर कैंसर में एक जैसी स्थिति नहीं होती। यह निर्भर करता है कि लिवर में कैंसर सीधे ही आया है या शरीर में कहीं और कैंसर हुआ है और फिर वहां से कैंसर सेल्स लिवर तक पहुंच गई हैं।
लिवर कैंसर के लक्षण क्या हैं?
डॉ. शुक्ला बताती हैं कि अगर कैंसर में लिवर भी शामिल हो रहा है तो कुछ सामान्य लक्षण सामने आते हैं।
पीलिया हो जाना
भूख कम लगना
वजन कम हो जाना
बुखार आना
बहुत ज्यादा थकान होना
खुजली होना
डॉ. आगे कहती हैं कि लिवर कैंसर (Liver Cancer) दो तरह से होता है। पहला ये कि उस कैंसर का सोर्स शरीर में कहीं और है, यानि यह ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर, ओरल कैंसर आदि हो सकता है और फिर उसके बाद कैंसर सेल्स लिवर तक पहुंच जाती हैं। इसे मेटास्टेटिक कैंसर कहते हैं। दूसरा होता है कि लिवर में ही कैंसर पन प रहा है, जैसे हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा, कोलेंजियो कार्सिनोमा है आदि हैं। हालांकि इन सभी कैंसर के लिए काफी बेहतर दवाएं और थेरेपी आ गई हैं और शुरुआती स्टेजों में इलाज के बाद दसों साल तक जीते हैं।