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संजू सैमसन हैं धैर्य और साहस की असली पहचान, टीम से बाहर हुए, लेकिन जब वापसी की तो मचाया तहलका

क्रिकेट सिर्फ रन और रिकॉर्ड का खेल नहीं होता, यह इंतजार, संघर्ष और आत्मविश्वास की परीक्षा भी होता है। संजू सैमसन की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। टी20 विश्वकप से ठीक पहले प्लेइंग-11 से बाहर होना, आलोचनाओं का सामना करना, ये सब किसी भी खिलाड़ी का मनोबल तोड़ सकते थे, लेकिन संजू ने हार नहीं मानी। उन्होंने चुपचाप अपने खेल पर काम किया, धैर्य रखा और सही मौके का इंतजार किया।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। क्रिकेट सिर्फ रन और रिकॉर्ड का खेल नहीं होता, यह इंतजार, संघर्ष और आत्मविश्वास की परीक्षा भी होता है। संजू सैमसन की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। टी20 विश्वकप से ठीक पहले प्लेइंग-11 से बाहर होना, आलोचनाओं का सामना करना, ये सब किसी भी खिलाड़ी का मनोबल तोड़ सकते थे, लेकिन संजू ने हार नहीं मानी। उन्होंने चुपचाप अपने खेल पर काम किया, धैर्य रखा और सही मौके का इंतजार किया।

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टी20 विश्वकप के दौरान जब बाकी भारतीय बल्लेबाज फेल हुए तो आवाज उठी एक नाम की- संजू सैमसन को फिर मौका दो। संजू को जब दोबारा मौका मिला तो उन्होंने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि आलोचक भी तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। उनकी वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह आत्मविश्वास, संयम और साहस की जीत थी। संजू सैमसन ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हर ठोकर सिर्फ आगे बढ़ने की ताकत देती है।

कोलकाता में खेले गए मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर वेस्टइंडीज को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। टीम ने 20 ओवर में चार विकेट पर 195 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने संजू सैमसन की 97 रनों की विस्फोटक पारी की मदद से 19.2 ओवर में पांच विकेट पर 199 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया है।

गत चैंपियन भारतीय टीम ने इस तरह लगातार तीसरी बार और कुल छठी बार इस टूर्नामेंट के अंतिम चार में प्रवेश किया है। भारत अगर वेस्टइंडीज को हरा सका तो इसके पीछे सबसे बड़ा योगदान सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन का है जिन्होंने रविवार को दमदार पारी खेली। भारत के लिए सैमसन ने एक छोर से मोर्चा संभाले रखा और अंत तक टिके रहे। सैमसन ने जैसे ही विजयी चौका लगाया, भारतीय ड्रेसिंग रूम में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

 

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