यूपी की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की जानकारी सामने आने के साथ ही उन्हें लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात और इस्तीफे का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से कनेक्शन होने को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं।
नई दिल्ली। यूपी की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की जानकारी सामने आने के साथ ही उन्हें लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात और इस्तीफे का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से कनेक्शन होने को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, एक न्यूज चैनल से खास बातचीत में इस्तीफे के बाद राजनीति में आने के सवाल पर दिव्या मित्तल ने फिलहाल साफ इनकार किया है।
राहुल गांधी से मिलने के बाद दिया इस्तीफा : बीजेपी प्रवक्ता
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट और बीजेपी प्रवक्ता सोशल मीडिया पर प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल को लेकर दावा बड़ा किया है कि उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफा दिया है। उनका दावा है कि इस्तीफे के पीछे का मकसद यूपी चुनाव में कांग्रेस का एजेंडा फैलाना है। उन्होंने लिखा कि एक IAS का खूब पीआर हो रहा है कि इस्तीफा दे दिया पर ये नहीं बताया जा कि रात के अंधेरे में राहुल गांधी से मिलने के बाद इस्तीफ़ा दिया है ताकि यूपी चुनाव में पप्पू का एजेंडा फैलाया जा सके।
एक IAS का खूब PR हो रहा है कि इस्तीफा दे दिया पर ये नहीं बताया जा कि रात के अंधेरे में राहुल गांधी से मिलने के बाद इस्तीफ़ा दिया है ताकि यूपी चुनाव में पप्पू का एजेंडा फैलाया जा सके।
सदैव राजा रहने की इच्छा थी इसलिए संयुक्त सचिव का पद रास नहीं आया क्यूँकि DM के बाद सीधा कमिश्नर…
पढ़ें :- VIDEO-IAS दिव्या मित्तल ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी, कहा- कोई ट्रिगर मोमेंट नहीं...,'यह नौकरी मेरे जीवन का सिर्फ एक चैप्टर थी'
— Prashant Umrao (@ippatel) August 30, 2026
प्रशांत उमराव ने कहा कि सदैव राजा रहने की इच्छा थी इसलिए संयुक्त सचिव का पद रास नहीं आया, क्यूंकि DM के बाद सीधा कमिश्नर बनना था। आत्ममुग्धता और पीआर की ललक इतनी अधिक कि मोदी सरकार की हर घर जल योजना को अपना प्रयास बताकर उद्घाटन कर दिया जाता था और स्थानीय सांसद को नहीं बुलाया जाता था।
उन्होंने कहा कि क्या कारण था कि जिन जिलों में रही वहां के किसी जनप्रतिनिधि से नहीं बनी और हर जगह राजा की तरह व्यवहार किया? अब सारे जनप्रतिनिधि तो ख़राब नहीं हो सकते जिन्हें जनता ने 2-3 बार चुना हो। इनके पति प्राइवेट नौकरी करते थे, इनके राजा बनने के बाद दलाली के धंधे में आ गए और करोड़ों रुपये इकट्ठा किए, जिसमें कुछ हिस्सा इनका पीआर करने वालों को जाता रहा, इसलिए उत्तर प्रदेश के सैकड़ों IAS में से केवल एक नाम काम करता हुआ सुनाई देता था।
दिव्या के इस्तीफे पर Grok ने क्या बताया?
दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर प्रशांत उमराव के इस दावे के बारे में उन्हीं की पोस्ट पर जब एक यूजर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट Grok से पूछा, तो जवाब मिला कि राहुल गांधी से मुलाकात या यूपी चुनाव का एजेंडा फैलाने की बात सार्वजनिक तौर पर प्रामाणिक नहीं है।
समाजवादी पार्टी ने क्या लिखा?
समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ईमानदार अधिकारी भाजपा सत्ता में भाजपाइयों के अपराध और भ्रष्टाचार से तंग आकर दबाव से तंग आकर नौकरी छोड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ ईमानदार आईएएस का इस सर्विस से इस्तीफा इस बात का साक्षात प्रमाण है कि उन्हें दबाव में लिया जा रहा था, भ्रष्टाचार के लिए मजबूर किया जा रहा था। भाजपाई भ्रष्टाचार कर रहे थे, अपराध कर रहे थे और बदनाम ईमानदार IAS को कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी और देवरिया, मिर्जापुर व संत कबीरनगर जिलों की डीएम रहीं दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि “इस सरकार में ईमानदार अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं। करप्शन इतना है कि ईमानदार अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं। ईमानदार अधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं और लिख रहे हैं। राम मंदिर मामले में भी जो अधिकारी ईमानदार हैं, वे ईमानदारी से काम नहीं कर पा रहे हैं, उन पर इतना दबाव है।