बिहार की राजनीति ने आज एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया। दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की सत्ता संभालने वाले और ‘सुशासन बाबू’ (Sushasan Babu) के नाम से पहचाने जाने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में कदम रखने का फैसला किया है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।
पटना। बिहार की राजनीति ने आज एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया। दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की सत्ता संभालने वाले और ‘सुशासन बाबू’ (Sushasan Babu) के नाम से पहचाने जाने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में कदम रखने का फैसला किया है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उनके साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पांच अन्य उम्मीदवारों ने भी पर्चा भरा। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) भी बिहार विधानसभा परिसर में मौजूद रहे, जिससे इस घटनाक्रम की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने स्वयं सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही 2005 से अब तक के उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल का समापन तय हो गया है। वे अब तक रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जो राज्य की राजनीति में एक अनूठा अध्याय माना जाता है। उन्होंने कहा कि नई सरकार और नए मुख्यमंत्री को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) को मिली प्रचंड जीत के बाद से ही सत्ता संरचना में संभावित बदलाव की चर्चाएं तेज थीं। अब जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) राज्यसभा जा रहे हैं, तो यह संभावना प्रबल हो गई है कि बिहार में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारीभारतीय जनता पार्टी के किसी नेता को सौंपी जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। हिंदी पट्टी के राज्यों में बिहार ही ऐसा राज्य रहा है, जहां अब तक भाजपा का कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा।
बिहार राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि गुरुवार थी। राज्य विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का उच्च सदन के लिए निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इस फैसले का विरोध भी सामने आया है। सुबह से बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुटे और उन्होंने इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को मुख्यमंत्री पद पर बने रहना चाहिए था। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के पुत्र निशांत कुमार को नई सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री और संभावित मुख्यमंत्री दावेदार Samrat Choudhary ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को बधाई देते हुए कहा कि उनका दूरदर्शी नेतृत्व और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता प्रेरणादायक रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का अनुभव राज्यसभा की गरिमा को और सुदृढ़ करेगा।