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गाजीपुर एग्रो प्लांट से निकलने वाला जहरीला पानी 42 गावों के बच्चों को बना रहा है विकलांग, जल जीवन मिशन बना छलावा, प्रदूषित हैडपंप का पानी पीने को मजबूर लोग

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)  का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण परिवारों को व्यक्तिगत नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, ताकि उनके स्वास्थ्य व जीवन स्तर में सुधार हो सके। साथ ही पानी लाने के घंटों को कम करके महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाना, जिससे वे शिक्षा और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

By संतोष सिंह 
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गाजीपुर। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)  का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण परिवारों को व्यक्तिगत नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, ताकि उनके स्वास्थ्य व जीवन स्तर में सुधार हो सके। साथ ही पानी लाने के घंटों को कम करके महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाना, जिससे वे शिक्षा और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

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एग्रो और एनर्जी प्लांट से निकलने वाले केमिकल नहर में बहा दिया जाता है, जहरीले पानी से करीब पांच किलोमीटर दायरे में आने वाले करीब 42 गांव  प्रभावित

इस मिशन के दावों के विपरीत यूपी के गाजीपुर जिले में एक बड़ा एग्रो और एनर्जी प्लांट लगा है। एग्रो प्लांट से निकलने वाले केमिकल वाले पानी को नहर में बहा दिया जाता है। इस जहरीले पानी से करीब पांच किलोमीटर दायरे में आने वाले करीब 42 गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि साल 2007 में प्लाट लगने के बाद से बुखार व शारीरिक अक्षमता के केस बढ़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट चलाने के लिए प्रतिदिन तीन लाख लीटर भूजल का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद केमिकल युक्त पानी (Chemically Treated Water) नहर में बहाया जाता है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है। प्रभावित गावों के लोग हैडपंप का पानी पीते हैं। हर घर नल योजना की पाइपलाइन तो बिछ गई है, लेकिन पानी नहीं आता है।

दो जून की रोटी का करें इंतजाम  या फिर अपने लाडलों के बेहतर इलाज के लिए जुटाएं धन 

गाजीपुर के गांवों में रहस्यमयी बुखार से प्रभावित परिवारों और पीड़ित बच्चे-युवाओं की कहानी एक जैसी है। मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले परिवारों पर ऐसा संकट टूटा है कि दो समय की रोटी का इंतजाम करें या फिर अपने लाडलों के बेहतर इलाज के लिए धन जुटाएं। दी रहस्यमयी बुखार बच्चों के माता-पिता ने गाजीपुर में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ थे लेकिन किया अक्षम सभी प्रभावित के अनुसार जन्म के समय बच्चे बिल्कुल कुछ समय बीतने यानी किसी को चार महीने, किसी को दो साल और किसी को 5 साल की उम्र में अचानक तेज बुखार आया। बुखार उत्तरते-उतरते लगातर झटके आने लगे और फिर मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं। शारीरिक नियंत्रण न रहने के कारण माता-पिता अपने बच्चों को ही रस्सियों और जंजीरों के सहारे बांधकर रखने को मजबूर हैं। हरिहरपुर गांव की शुभावती देवी बताती हैं कि उनकी बेटी प्रिया और परिधि पैदा होने के 5-6 महीने बाद बुखार आने के बाद दिव्यांग हो गई। दोनों के हाथ-पैर टेढ़े हो गए हैं। प्रिया एक बार छत से कूद पड़ी थी ऐसे में अब उसे बांधकर रखना पड़ता है गुजरात मे मजदूरी करने वाले प्रिया व परिधि के पिता राजू चौहान अपनी बेटियों के इलाज पर प्राइवेट डॉक्टरों की जेबे भरते रहे। आश्वासन मिलता कि लंबे इलाज से स्थिति ठीक हो जाएगी, लेकिन पांच साल हो गए। राहत नहीं मिली।

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एक मुट्ठी अनाज अ​भियान से गंभीर मामला हुआ उजागर

यह गंभीर मामला तब सामने आया जब समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने सितंबर से एक मुठ्ठी अनाज अभियान शुरू किया। सिद्धार्थ राय और उनकी टीम अब तक42 गांवों के एक-एक घर से एक मुट्टी अनाज के बदले परिवार की पूरी कुंडली तैयार कर चुकी है। किस परिवार में कितने लोग और बीमार कौन? सरकारी योजनाओ का लाभ मिला या नहीं। यह सबकुछ ब्योरा जुटाने के दौरान रस्सी- जंजीर से बंधे बच्चे-युवाओं को देख उन्होंने परिजनों से विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर रहस्मयी बुखार से अवगत कराया। राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच करवाने के निर्देश दिए।

राजभवन के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें और एंबुलेंस दौड़ने लगी है गांवों में 

माता-पिता की आखों में बेबसी है। वे कहते है कि बच्चे पैदा तो पूरी तरह स्वस्थ हुए थे। कुछ महीने बाद बुखार आया और इनकी यह हालत हो गई। कई साल इलाज करवाने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ, न ही डॉक्टर कुछ स्पष्ट बता पा रहे हैं। गाजीपुर के मनिहर, सदर, बहादीपुर, फतेहउल्लाहपुर, हरिहरपुर, हुए धारीकला, तारडीह, राठौली सराय, खुटहन, भौरहारा, बुढ़नपुर समेत दर्जन भर गांवों में ऐसे कई केस हैं। समाजसेवी सिद्धार्थ राय के तरफ से मामले को प्रमुखता से उठाए जाने, राजभवन के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें और एंबुलेंस गांवों में दौड़ने लगी है। बुखार के बाद लगातार झटके आना, मानसिक और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे 46 बच्चों की सूची प्रशासन को सौपी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे बच्चे 100 से अधिक है। 40 बच्चों का इलाज बीएचयू में किया जा चुका है, पर अभी तक राहत नहीं मिली।

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बहादीपुर गांव की गायत्री देवी अपनी बेटी सलोनी बिंद (18) की असहाय हालत देखकर फफक पड़ती हैं। बताती हैं कि सलोनी पांच साल की उम्र तक गांव के बच्चों के साथ खेलने के साथ स्कूल में पढ़ने जाती थी। अचानक बुखार ने पकड़ा तो स्कूल को छूट ही गया, कुछ सुन-समझ नहीं पाती है। घर के अंदर या बाहर चबूतरे पर सिर झुकाए बैठी रहती है। सलोनी की बहन रमिता (13) को तीन साल की उम्र में ऐसा बुखार पकड़ा कि पैर-हाथ टेढ़े हो गए है। सत्येद्र चौहान की बेटी पूनम (8) भी गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ती थी। सात-आठ महीने पहले बुखार आया तो अस्पताल में इलाज के दौरान कई दिनों तक बेहोश पड़ी रही। होश में आने के बाद अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकी। नानी उषा देवी उसे सहारा देती हैं तब वह घर के बाहर-अंदर कर पाती हैं। डेढ़ साल के अयांश को पैदा होने के कुछ ही दिन बाद बुखार आने से हालत यह है कि वह बैठ नहीं सकता है। गर्दन लटकी रहती है। प्रभावित गांव के राहुल, मनोज, ज्योति, अंशु यादव, अर्जुन, आकाश, अंबिका, पीयूष भी दिव्यांग हो चुके है।

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CMO गाजीपुर डॉ. एसके पांडेय (CMO Ghazipur Dr. SK Pandey) ने बताया कि 11 गांवों में कैंप लगाकर मरीजों की जांच की गई। संदिग्ध बुखार के कारण निःशक्त होना सामने नही आया है। मरीजों मे मेटल, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर पाया गया। इसके पीछे आनुवांशिक, जन्म के समय मस्तिष्क में ऑक्सिजन की कमी, फेफड़ों का ठीक से काम न करना और गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा बिना डॉक्टरी परामर्श के बुखार की प्रतिबंधित दवाएं खाना कारण हो सकता है। वही, कुछ मिर्गी के मरीज ऐसे है, जिनका घरवाले इलाज नहीं करवा रहे है।

डीएम गाजीपुर अविनाश कुमार (DM Ghazipur Avinash Kumar) ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संभवतः गर्भावस्था में बुखार आने या तेज वायरल फीवर के कारण ऐसा हुआ है। सभी पीड़ितों का बेहतर इलाज करवाया जाएगा।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित घोष (Principal Secretary Health Amit Ghosh) ने बताया कि CMO से रिपोर्ट मांग ली गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

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