महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने औरंगजेब की कब्र को लेकर कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की रविवार को निंदा की। उन्होंने कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से इतिहास से जुड़ी जानकारियों के लिए व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों पर निर्भर न रहने को कहा।
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने औरंगजेब की कब्र को लेकर कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की रविवार को निंदा की। उन्होंने कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से इतिहास से जुड़ी जानकारियों के लिए व्हाट्सऐप पर आने वाले संदेशों पर निर्भर न रहने को कहा। ठाकरे ने यहां शिवाजी पार्क में वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मुगल शासक ‘एक विचार को मारना चाहते थे और वह है शिवाजी’ ,लेकिन असफल रहे।
आज मुंबईतील "शिवतीर्थ" या मैदानावर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेच्या गुढीपाडवा मेळाव्याला संबोधित केलं या भाषणातील महत्वाचे मुद्दे –
१) गेल्या निवडणुकीत ज्यांनी मतदान करून ज्यांची मतं दिसली त्या मतदारांचे मी आभार मानतो आणि ज्या मतदारांनी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेला मतदान करून देखील,… pic.twitter.com/Enq1a98fUE
— Raj Thackeray (@RajThackeray) March 30, 2025
क्या आपको विक्की कौशल को देखकर संभाजी महाराज के बलिदान और अक्षय खन्ना को देखकर औरंगजेब के बारे में पता चला?
उन्होंने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था। यह छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना संभव नहीं था। ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता से लोगों के उकसावे में नहीं आने और विचलित न होने का आग्रह करते हुए कहा कि शिवाजी से पहले और शिवाजी के बाद के युगों में सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न थीं। उन्होंने कहा कि हम मौजूदा समय के असली मुद्दों को भूल गए हैं। एक फिल्म देखकर जागने वाले हिंदू किसी काम के नहीं हैं। क्या आपको विक्की कौशल को देखकर संभाजी महाराज के बलिदान के बारे में और अक्षय खन्ना को देखकर औरंगजेब के बारे में पता चला?
अफजल खान और शिवाजी महाराज दोनों के वकील ब्राह्मण थे, लेकिन इतिहास को लेकर अभी की जा रही है जाति की राजनीति
राज ठाकरे ने कहा, कि अफजल खान और शिवाजी महाराज दोनों के वकील ब्राह्मण थे, लेकिन पुराने इतिहास को लेकर अभी जाति की राजनीति की जा रही है। मैं फिर एक बार कहता हूं, औरंगजेब का राज अफगान से दक्षिण तक था। औरंगजेब के बेटे को शह संभाजी महाराज ने दी थी। इतना बड़ा बादशाह क्यों महाराष्ट्र में मरते दम तक रुका, क्योंकि उसे छत्रपति शिवाजी महाराज का विचार मारना था।’
अगली पीढ़ी को बताना चाहिए कि देखो हमारे पूर्वजों ने ऐसे क्रूर शासकों को यहां मारा
राज ठाकरे ने कहा, कि अब जो कब्र है ना, उसे बिना सजाए रखें और वहां एक बोर्ड लगाएं कि जो हमें मारने आया था, उसे हमने यहीं गाड़ा। हमारे इतिहास के बारे में पता चलना चाहिए कि हमारे दुश्मनों को हमने इसी मिट्टी में मारकर गाड़ा। बच्चों को सिखाना चाहिए, अगली पीढ़ी को बताना चाहिए कि देखो हमारे पूर्वजों ने ऐसे क्रूर शासकों को यहां मारा।
औरंगजेब की कब्र बनी रहनी चाहिए या उसे तोड़ा जाना चाहिए? ये मुद्दे अभी कैसे आ गए?
ठाकरे ने कहा कि आपको व्हॉटसऐप पर इतिहास समझ में नहीं आता। इसके लिए आपको किताबें पढ़नी होंगी। अब कोई भी इतिहास के बारे में बात नहीं करने लगा है। वे विधानसभा में भी औरंगजेब के बारे में बात करते हैं। राज ठाकरे ने कहा, कि वर्तमान स्थिति में मूल मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सभी मुद्दे भटक रहे हैं। हमें जंगल की चिंता नहीं है, हमें पानी की चिंता नहीं है। हमें सिर्फ औरंगजेब की चिंता है। वह अंगूर खा रहा है और हम लड़ रहे हैं। औरंगजेब की कब्र बनी रहनी चाहिए या उसे तोड़ा जाना चाहिए? ये मुद्दे अभी कैसे आ गए?
गंगा को साफ करने वाले पहले व्यक्ति राजीव गांधी थे : मनसे प्रमुख
मनसे प्रमुख ने महाकुंभ मेले पर बात करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में कुछ घटनाएं हुई हैं। मुझे आपको उनके बारे में बताना चाहिए। उस दिन जब मैंने कुंभ मेले में भाषण दिया था, तो कुछ हिंदुत्ववादियों ने सोचा कि मैंने कुंभ मेले का अपमान किया है। हमारे देश में नदियों की भयानक स्थिति है, जिन्हें हम अपनी मां कहते हैं, हमारे शासकों द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है। मुझे याद है कि गंगा को साफ करने वाले पहले व्यक्ति राजीव गांधी थे। तब से लेकर अब तक गंगा साफ हो गई है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही कहा है।
सवाल गंगा और कुंभ के अपमान का नहीं है, सवाल गंगा की सफाई का है
मनसे प्रमुख ने कहा कि उत्तर से कई लोग मेरे पास आए हैं। वहां स्नान करने वाले कई लोग बीमार पड़ गए हैं। हमारे देश में नदियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। नदियों को हम माता कहते हैं। पहले राजीव गांधी और अब 2014 में मोदी ने कहा कि गंगा साफ करेंगे। लेकिन लाखों लोग गंगा में स्नान करके बीमार हुए। सवाल गंगा के अपमान और कुंभ के अपमान का नहीं है, सवाल गंगा की सफाई का है।
राज ठाकरे ने आगे कहा, कि क्या हमें अपनी स्थिति में सुधार नहीं करना चाहिए? अब समय बदल गया है, जनसंख्या बढ़ गई है। पहले चीजें अलग थीं। अब स्थिति अलग है। एक हजार साल पहले चीजें अलग थीं। अब स्थिति अलग है। अब, क्या हम इस तरह के अनुष्ठान करने के लिए घाट पर जगह नहीं बना सकते थे? फिर वे कहते हैं कि लोग सुन नहीं रहे हैं। हमारी नदियाँ साफ रहनी चाहिए। हम धर्म के नाम पर नदियों को नष्ट कर रहे हैं। हमारे धर्म में सुधार होना चाहिए।
अगर हमारी प्राकृतिक संपत्ति की रक्षा के बीच में धर्म आ रहा होगा तो वह धर्म किस काम का है?
राज ठाकरे ने कहा कि अब तक 33 हजार करोड़ रुपए गंगा की सफाई पर खर्च हुए। आधे जले शवों को गंगा में बहाया जा रहा है। अगर हमारी प्राकृतिक संपत्ति की रक्षा के बीच में धर्म आ रहा होगा तो वह धर्म किस काम का है? वहां अलग व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती? क्या हम धर्म के नाम पर नदियों को बर्बाद और प्रदूषित नहीं कर रहे हैं? जब मैं यह सब देख रहा था तो मुझे समझ में नहीं आया।’ उन्होंने कहा कि 65 करोड़ लोगों ने स्नान किया, इसका मतलब है कि आधे भारत ने स्नान किया। महाराष्ट्र की नदियों की स्थिति भी वैसे ही खराब है।