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अस्पताल से सोनम वांगचुक का बड़ा संदेश- 20 जुलाई आज़ादी का दूसरा आन्दोलन भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत

Sonam Wangchuk's message : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। जहां से शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई क्योंकि लंबी भूख हड़ताल के कारण उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने लगे हैं। लेकिन, पुलिस की इस कार्रवाई की चौतरफा आलोचना हो रही है और मोदी सरकार पर तानाशाही के आरोप लग रहे हैं। इस बीच, सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों के नाम एक संदेश भेजा है।

By Abhimanyu 
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Sonam Wangchuk’s message : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। जहां से शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई क्योंकि लंबी भूख हड़ताल के कारण उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने लगे हैं। लेकिन, पुलिस की इस कार्रवाई की चौतरफा आलोचना हो रही है और मोदी सरकार पर तानाशाही के आरोप लग रहे हैं। इस बीच, सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों के नाम एक संदेश भेजा है।

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एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने रविवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “सोनम का संदेश: 20 जुलाई आजादी का दूसरा आंदोलन भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत। अन्याय से आज़ादी (जैसे पेपर लीक)… डर से आज़ादी (मेरी गैर-कानूनी हिरासत)…. भारत का दूसरा आज़ादी का आंदोलन…संसद तक मार्च कृपया इसे बड़ी कामयाबी बनाएं.. गीतांजलि के ज़रिए भेजा गया… सफ़दरजंग में मेरी ग़ैर-क़ानूनी हिरासत से।” इससे पहले सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो (wife, Gitanjali J. Angmo) ने अस्पताल प्रशासन और जांच रिपोर्ट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) की रिपोर्ट के मुताबिक वांगचुक का पोटेशियम स्तर गिरकर 2.9 हो गया है, जबकि कल ही यह 4.3 था। अस्पताल प्रशासन हमें किसी अन्य लैब से सेकंड ओपिनियन (दूसरी राय) लेने की अनुमति नहीं दे रहा है, और न ही हमारे सामने ब्लड सैंपल दे रहा है ताकि हम बाहर जांच करा सकें। इस अपारदर्शिता के कारण हमें संदेह हो रहा है। हमने अस्पताल से तुरंत डिस्चार्ज की मांग की है ताकि हम अपनी पसंद के अस्पताल में उनका इलाज करा सकें, लेकिन पिछले दो घंटों से हमें कोई जवाब नहीं मिला है।

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