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मोदी सरकार के एक और जुमले का अंत, अब स्मार्ट सिटी मिशन पर लगा ताला, 84 शहरों में हैं प्रोजेक्ट्स अधूरे : कांग्रेस

केंद्र सरकार के शहरी मामलों के मंत्रालय के तरफ से स्मार्ट सिटी मिशन जून 2015 में शुरू हुआ था। अब 100 शहरों को कवर करने के लिए निर्धारित था, लेकिन 10 सालों में तीन बार डेडलाइन बढ़ाने के बावजूद केवल 16 शहरों में ही मिशन के तहत सभी प्रोजेक्ट्स पूरे हो पाए हैं। बाकी 84 शहरों में कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए हैं।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के शहरी मामलों के मंत्रालय के तरफ से स्मार्ट सिटी मिशन जून 2015 में शुरू हुआ था। अब 100 शहरों को कवर करने के लिए निर्धारित था, लेकिन 10 सालों में तीन बार डेडलाइन बढ़ाने के बावजूद केवल 16 शहरों में ही मिशन के तहत सभी प्रोजेक्ट्स पूरे हो पाए हैं। बाकी 84 शहरों में कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए हैं। इस मिशन में 14 हजार करोड़ से अधिक का निवेश किया गया था, लेकिन बड़े हिस्से में काम समय पर पूरा नहीं हो सका।

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इसको लेकर कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार के एक और जुमले का अंत,स्मार्ट सिटी मिशन खत्म। स्मार्ट सिटी मिशन के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 100 में से सिर्फ 16 शहरों में काम पूरे होने का दावा सरकार कर रही है। 84 शहरों में 14, 000 करोड़ रुपये के काम अधूरे और 10 साल में 3 बार स्कीम की डेडलाइन बढ़ाई गई लेकिन योजना पूरी नहीं हो पाई।

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स्कीम की तारीखें

• जून 2015 में घोषित हुई थी स्कीम।
• सितंबर 2016 में 60 शहरों का चयन।
• जून 2017 में 30 शहरों का चयन ।
• जनवरी 2018 में 10 शहरों का चयन ।
• 100 शहरों को मार्च 2023 तक प्रोजेक्ट पूरे करने थे।

स्मार्ट सिटी के कुछ मापदंड हैं

• पर्याप्त जल और बिजली आपूर्ति
• कूड़ा प्रबंधन
• कुशल सार्वजनिक परिवहन
• कम आय वर्ग के लिए आवास
• IT कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण
• ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी
• पर्यावरण संरक्षण
• नागरिकों की सुरक्षा
• अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इस हिसाब से तो जिन शहरों में काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। क्या वो वाक़ई में स्मार्ट सिटी बन गए हैं? बरेली से लेकर रांची, सूरत से लेकर वाराणसी, वडोदरा से लेकर पुणे- में स्मार्ट क्या बना यह तो नहीं समझ आया। बड़ी बड़ी सड़कें ज़रूर अभी भी खुदी हुई हैं।

श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि किसानों की दोगुनी आमदनी हो या रुपया डॉलर एक क़ीमत पर करना या 15 लाख हर अकाउंट में या 2 करोड़ सालाना रोज़गार या 100 स्मार्ट सिटी का जुमला – योजनायें तो खूब ढोल नगाड़े के साथ लायी गईं, लेकिन हकीकत में धराशायी हो गईं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ निकम्मापन ही नहीं, भ्रष्टाचार भी है। स्मार्ट सिटी मिशन के नाम पर हज़ारों करोड़ फूंक दिए और अब स्कीम बंद कर दी।

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इसी पोस्ट में उन्होंने कुछ सवाल भी किए हैं?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के कुछ सवाल है कि भला इस खर्च का जवाबदेह कौन है? जनता के हज़ारों करोड़ रुपए हज़म करके डकार भी ना लेने का ज़िम्मेवार कौन है? कौन है इस फेल्ड स्कीम का ज़िम्मेदार? क्या मोदी सरकार सिर्फ़ स्कीम बंद करके काम बीच में छोड़कर अपना पलड़ाझाड़ सकती है? सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि ज़ुबानी जमा खर्च के अलावा यहां तो भ्रष्टाचार की भी बू आ रही है।

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