मां दुर्गा के भक्तों के लिए चैत्र नवरात्रि का पर्व विशेष् महत्व है। इस दौरान भक्त माता के नौ अलग.अलग रूपों की पूजा करते है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार,इस बार मा दुर्गा पालकी पर सवार होकर धरती लोक पर आने वाली हैं। वहीं हाथी पर बैठकर माता प्रस्थान करेंगी। इस दौरान किए गए पूजा.पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है।
मान्यताओं के अनुसार, माता रानी का पालकी पर आने अर्थ ये है कि देश.दुनिया महामारी और बीमारी की चपेट में आ सकती है। माता का पालकी पर सवार होकर आना व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी यह शुभ नहीं रहता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (Ghatsthapna Muhurat)
नवरात्रि के त्यौहार का पहला दिन घटस्थापना या कलश स्थापना (kalash sthanpna) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसी के साथ नौ दिवसीय पूजा का आरंभ होता है। इस वर्ष घटस्थापना के लिए प्रातः 06:52 बजे से 07:43 बजे तक का समय विशेष शुभ रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी कलश स्थापना की जा सकती है।
शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक स्थापित किया गया कलश घर में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।