कोडिन सिरप के मामले में गिरफ्तार बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह पर अब ईडी का शिकंजा कसेगा। करोड़ों रुपयों बनी आलीशान कोठी बनवाने में आलोक सिंह ने एक रुपये का भी हाउसिंग लोन नहीं लिया। आलोक सिंह की ये आलीशान कोठी स्वास्तिका सिटी में बना हुआ है। कोठी जिस जमीन पर बनी है वो आलोक सिंह की पत्नी के नाम पर दर्ज है।
लखनऊ। कोडिन सिरप के मामले में गिरफ्तार बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह पर अब ईडी का शिकंजा कसेगा। करोड़ों रुपयों बनी आलीशान कोठी बनवाने में आलोक सिंह ने एक रुपये का भी हाउसिंग लोन नहीं लिया। आलोक सिंह की ये आलीशान कोठी स्वास्तिका सिटी में बना हुआ है। कोठी जिस जमीन पर बनी है वो आलोक सिंह की पत्नी के नाम पर दर्ज है। बताया जा रहा है कि, अब ईडी जल्द ही आलोक सिंह से जेल में पूछताछ करेगी या फिर उसे कस्टडी रिमांड पर लेगी।
इसके साथ ही, उससे करोड़ों के इस घर को बनवाने के खर्च हुई रकम की भी जानकारी मांगी जाएगी। अगर वह सोर्स नहीं बता सके तो इंडी उसे अपराध से जुटाई आय से बनी संपत्ति मानकर अटैच करेगी। इसके साथ ही ईडी शुभम जायसवाल और सहारनपुर के विशाल व विभोर की कीमती संपत्तियों को भी अटैच कर सकती है। ईडी बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह से पूछताछ के जरिए पिछले 10 वर्षों की आय के स्रोत, उनसे हुई आय के बारे में जानकारी मांगेगी। अगर आलोक सिंह जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो ईडी उनकी पत्नी से भी पूछताछ कर सकती है। क्योंकि जिस जमीन पर आलोक की करोड़ों की कोठी है वह उसकी पत्नी के नाम पर है।
बताया जा रहा है कि, ईडी ने आलोक सिंह से जुड़े बैंक खातों, आय के सभी स्रोत, आईटीआर व संपत्तियों का ब्योरा जुटाया है। इनके द्वारा जुटाई गई संपत्तियां इनकी आय से कई गुना ज्यादा की हैं। जबकि इनके आईटीआर इसके मुकाबले काफी कम हैं। जो भी आरोपित जेल में हैं ईडी ने उनसे इन संपत्तियों के स्रोत के बारे में जानकारियां जुटा रही है।
इसके साथ ही, आर्पिका फार्मा के मनोहर जायसवाल को ईडी 12 जनवरी को उनकी पत्नी अर्चना मनोहर जायसवाल को 13 जनवरी को और उनकी बेटी आकांक्षा गुप्ता को 14 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके पहले भी ईडी दो बार आरोपितों को पूछताछ के लिए बुला चुकी है, लेकिन वे लोग ईडी के सामने पेश नहीं हुए। आरोपितों ने ईडी से पेश होने के लिए समय मांगा था।
वहीं, ईडी ने नामी फार्मा कंपनियों एबॉट, ल्यूपिन, वर्धमान, एरिस्टो फार्मा, विश्वनाथ फार्मा समेत एक दर्जन से ज्यादा दवा कंपनियों से उनके पिछले 10 सालों की सप्लाई व अन्य ट्रांजेक्शन का ब्योरा मांग लिया है। खासतौर से कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में नामजद आरोपितों को सप्लाई की गई बोतलों का ब्योरा 30 मांगा गया है। ईडी का अनुमान है कि यह खेल एक-दो साल से नहीं बल्कि करीब 10 वर्षों से चल रहा था।