उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने में अभी कुछ वक्त है लेकिन इससे पहले प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ने लगा है। नेताओं के पाला बदलने का दौर भी शुरू हो गया है। वहीं, यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने में अभी कुछ वक्त है लेकिन इससे पहले प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ने लगा है। नेताओं के पाला बदलने का दौर भी शुरू हो गया है। वहीं, यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। नसीमुद्दीन पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और ICC मेंबर थे।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे के बाद अब अटकलों को दौर शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि, वो अब जल्द ही नई राजनीतिक पारी की शुरूआत करेंगे। सूत्रों की माने तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में जा सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि, वो ओवेसी के भी संपर्क में हैं। हालांकि, उनकी तरफ से अभी इसको लेकर कोई औपचारिक एलान नहीं किया गया है लेकिन आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा कि नसीमुद्दीन अब किस पार्टी में शामिल होंगे।
बता दें कि, नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूल रूप से बांदा जिले के स्योंढ़ा गांव के रहने वाले हैं। उनका राजनीतिक सफर 1988 में बांदा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से शुरू हुआ। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने बसपा ज्वाइन की। 1991 में बसपा के टिकट से नसीमुद्दीन ने बांदा सदर सीट से विधायक का चुनाव जीतकर इतिहास रचा और रमायावती के खास और भरोसेमंद नेता भी बन गए। 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तब उनकी राजनीतिक मजबूती और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें ‘मिनी मुख्यमंत्री’ भी कहा गया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। जब मायावती 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक शॉर्ट टर्म गवर्नमेंट में मंत्री रहे। 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए वे फिर कैबिनेट का हिस्सा रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक फुल टाइम गवर्नमेंट में मंत्री रहे। हालांकि, उन्होंने 2018 में बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।