महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य द्वारा दिनांक 30.03.2026 को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कानपुर नगर, को पत्र लिखा। ये पत्र कांशीराम अस्पताल (ट्रामा सेंटर), कानपुर नगर को लगभग ₹3,15,00,000/- (तीन करोड़ पंद्रह लाख रुपये) की खरीद प्रक्रिया में प्राप्त गंभीर शिकायतों के आधार पर लिखा गया, जिसमें कहा गया कि, उक्त राशि से किए जाने वाले समस्त भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया से लेकर उसके भुगतान में किया जा रहा खेल जगजाहिर हो गया है। अनियमितता और गुणवत्तापूर्वक काम नहीं होने के बाद भी दवा माफियों को ‘राजनीतिक दबाव’ में भुगतान किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ मामला कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर कानपुर नगर के चिकित्सा उपकरणों के खरीद में हुई धांधली के बाद उजागर हुई है। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य ने भी इस धांधली को लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर ₹3,15,00,000/- (तीन करोड़ पंद्रह लाख रुपये) के भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद दवा माफिया मनीष मल्होत्रा के लिए राजनीतिक दबाव में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भुगतान करने की तैयारी कर चुके हैं और कल तक ₹3,15,00,000/ रुपये का भुगतान भी कर दिया जाएगा।
बता दें कि, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य द्वारा दिनांक 30.03.2026 को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कानपुर नगर, को पत्र लिखा। ये पत्र कांशीराम अस्पताल (ट्रामा सेंटर), कानपुर नगर को लगभग ₹3,15,00,000/- (तीन करोड़ पंद्रह लाख रुपये) की खरीद प्रक्रिया में प्राप्त गंभीर शिकायतों के आधार पर लिखा गया, जिसमें कहा गया कि, उक्त राशि से किए जाने वाले समस्त भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। उक्त पत्र के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए टेंडर प्रक्रिया एवं भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए शासन को इसकी सूचना प्रेषित कर दी गई।

हालांकि, इसके बाद से दवा माफिया मनीष मल्होत्रा को भुगतान करने की स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों ने तैयारी कर ली है। कहा जा रहा है कि, इसके पीछे मनीष मल्होत्रा को संरक्षण देने वाले राजनीतिक लोगों का भी दबाव है। अब यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार ऐसे राजनीतिक दबावों के समक्ष झुकेगी अथवा नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित करेगी।
करीब 22 सालों से स्वास्थ्य विभाग में कर काम
दवा माफिया मनीष मल्होत्रा की जड़े स्वास्थ्य विभाग में बेहद ही गहरी हैं। मनीष मल्होत्रा करीब 2004 से स्वास्थ्य विभाग में अपनी जड़े जमाए हुए है। अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के चलते मनीष मल्होत्रा का सिक्का स्वास्थ्य विभाग में दो दशकों से चल रहा है। सूत्रों की माने तो मनीष मल्होत्रा के काम में तमाम तरह की अनियमितता पाई गई है, जिसको लेकर शासन से स्वास्थ्य विभाग तक की शिकायतें हुईं लेकिन इसके बाद भी मनीष मल्होत्रा का सिक्का इस विभाग में बना हुआ है।

कौन देता है दवा माफिया को संरक्षण?
ऐसे में सवाल उठता है कि, आखिर माफिया को स्वास्थ्य विभाग से लेकर राजनीतिक संरक्षण कौन देता है। इतनी शिकातयों के बाद भी आखिर इसे कौन बचा जा रहा है। अब कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर कानपुर नगर के सुदृढीकरण व उच्चीकरण के लिए उपकरणों व साज—सज्जा में बड़ी अनियमितता पाई गयी है, जिसके बाद महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने लगभग ₹3,15,00,000/- (तीन करोड़ पंद्रह लाख रुपये) के भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि, इसमें मनीष मल्होत्रा की कंपनी ने सभी काम किए हैं।
बता दें कि, पर्दाफाश की टीम जल्द ही इसका खुलासा करेगी कि इन दवा माफियाओं को कौन संरक्षण दे रहा है। पर्दाफाश टीम के पास इसके अहम साक्ष्य हाथ लगे है, जिसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा।