यह कहावत कि 'इतिहास खुद को दोहराता है'। हाल ही में अमेरिका सरकार के तरफ से लिए गए फैसले पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 30वें अमेरिकी प्रेसिडेंट कैल्विन कूलिज के बाद वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को 24-कैरेट शुद्धसोने सिक्कों पर दिखने का सम्मान मिलने जा रहा है।
नई दिल्ली। यह कहावत कि ‘इतिहास खुद को दोहराता है’। हाल ही में अमेरिका सरकार के तरफ से लिए गए फैसले पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 30वें अमेरिकी प्रेसिडेंट कैल्विन कूलिज के बाद वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को 24-कैरेट शुद्धसोने सिक्कों पर दिखने का सम्मान मिलने जा रहा है।
बता दें कि अमेरिका सिर्फ़ दूसरी बार होगा जब किसी जिंदा प्रेसिडेंट की तस्वीर किसी सिक्के पर अंकित होगी। इससे पहले 30वें अमेरिकी प्रेसिडेंट कैल्विन कूलिज का नाम जॉर्ज वॉशिंगटन के साथ एक यादगार सिक्के पर आया था, जिसे यूएस की आजादी के 150 साल पूरे होने के मौके पर 1926 में बनाया गया था। अमेरिका के 250वें जन्मदिन (4 जुलाई 2026) के जश्न के लिए एक बहुत बड़ा और खास फैसला लिया गया है, जिसके तहत अब सोने के सिक्कों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर दिखाई देगी। यह सिक्के 24-कैरेट शुद्ध सोने से बने होंगे और इन्हें ‘स्मारक सिक्के’ (Commemorative Coins) कहा जाएगा, जिन्हें खास तौर पर यादगार के रूप में सहेजने के लिए बनाया जा रहा है। सिक्के के डिजाइन की बात करें तो इसके एक तरफ ट्रंप को व्हाइट हाउस के मशहूर ‘रेसोल्यूट डेस्क’ पर हाथ रखे हुए दिखाया गया है, जिस पर ‘आजादी’ (Liberty) और ‘ईश्वर पर हमारा विश्वास’ (In God We Trust) जैसे संदेश लिखे होंगे। यूएस मिंट (US Mint) द्वारा बनाए जाने वाले इन सिक्कों को कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स (CFA) ने 19 मार्च 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है।
यह खबर इसलिए भी इतनी चर्चा में है क्योंकि अमेरिका में सामान्य तौर पर किसी जीवित व्यक्ति या पद पर बैठे राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्कों पर नहीं छपती है, लेकिन इस बार सरकार ने खास नियमों के तहत इसकी इजाजत दी है। अमेरिकी इतिहास में 100 साल बाद यह दूसरा मौका है जब किसी सिटिंग प्रेसिडेंट (सेवारत राष्ट्रपति) का चेहरा सिक्कों पर नजर आएगा; इससे पहले 1926 में राष्ट्रपति केल्विन कूलिज के साथ ऐसा हुआ था। जहां ट्रंप के समर्थक इसे देश के गौरव और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विपक्षी पार्टी के नेता इस पर सवाल उठा रहे हैं और इसे परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं। कुल मिलाकर, आजादी की 250वीं सालगिरह पर यह फैसला पूरे अमेरिका में चर्चा और विवाद दोनों का विषय बना हुआ है।
रिपोर्ट: सुशील कुमार साह