प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले (NRHM Scam) की जांच तेज कर दी है। एनआरएचएम घोटाले (NRHM Scam) में आरोपी पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप (Former MLA Mukesh Srivastava, alias Gyanendra Pratap) की फर्मों को ब्योरा जुटाया गया है।
लखनऊ : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले (NRHM Scam) की जांच तेज कर दी है। एनआरएचएम घोटाले (NRHM Scam) में आरोपी पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप (Former MLA Mukesh Srivastava, alias Gyanendra Pratap) की फर्मों को ब्योरा जुटाया गया है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व विधायक व उनके करीबियों को अगले सप्ताह नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) से पूर्व विधायक की फर्मों को आवंटित कार्यों से जुड़ी कुछ और जानकारी भी मांगी गई है।
पूर्व विधायक के लिपिक भाई अजय श्रीवास्तव की भूमिका जांच के घेरे में
ईडी (ED) जांच के घेरे में पूर्व विधायक के लिपिक भाई अजय श्रीवास्तव (Ajay Srivastava) की भूमिका भी है। विजिलेंस ने पूर्व विधायक व उसके लिपिक भाई के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी केस दर्ज किया था। दोनों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में करोड़ों रुपये की संपत्तियां सामने आई थीं। ईडी (ED) ने उनकी संपत्तियों का भी ब्योरा लिया है।
वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2021-22 के बीच एनआरएचएम की विभिन्न योजनाओं के तहत लिए गए ठेकों व सप्लाई के कार्यों से जुड़े दस्तावेज जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका भी खंगाली जाएगी। मसलन, किन-किन नियमों की अनदेखी कर कार्य आवंटन व भुगतान किए गए थे और इसके लिए सीधी जिम्मेदारी किसकी थी। पूर्व विधायक व उनके करीबियों की आठ से अधिक फर्मों पर लिए गए कार्यों को खंगाला जा रहा है। इन फर्मों के संचालकों से भी पूछताछ होगी।