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विजय सरकार को कांग्रेस की बड़ी चेतावनी, कार्ति चिदंबरम बोले- लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट को RTI एक्ट से छूट देने का फैसला कोई अच्छी मिसाल नहीं

Tamil Nadu Law and Order Department exempted from RTI : सीएम सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी करके सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से छूट दी है। अब इस फैसले पर उनके सहयोगी दल कांग्रेस ने आपत्ति जतायी है। कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट को RTI एक्ट से छूट देने का फैसला कोई अच्छी मिसाल नहीं है।

By Abhimanyu 
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Tamil Nadu Law and Order Department exempted from RTI : सीएम सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी करके सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से छूट दी है। अब इस फैसले पर उनके सहयोगी दल कांग्रेस ने आपत्ति जतायी है। कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट को RTI एक्ट से छूट देने का फैसला कोई अच्छी मिसाल नहीं है।

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कांग्रेस नेता कार्ति पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टीवीके सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ” टीवीके (@TVKVijayHQ) सरकार का पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को RTI एक्ट से छूट देने का फ़ैसला कोई अच्छी मिसाल नहीं है। यह याद रखना ज़रूरी है कि RTI एक अहम फ़ैसला था जिसे कांग्रेस (@INCIndia) की अगुवाई वाली UPA सरकार ने पूरे भारत में लोकतांत्रिक जवाबदेही को मज़बूत करने के मकसद से लागू किया था।”

चिदंबरम ने आगे लिखा, “लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट कई अहम मामलों को संभालता है, जैसे पुलिस फायरिंग, कस्टडी में मौत, टॉर्चर और रिमांड पर मौजूद कैदियों की मौत की जांच रिपोर्ट; सुरक्षा से जुड़े नज़रबंदी के मामले; सांप्रदायिक और जातीय टकराव की रिपोर्ट; राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने की अपील; और मानहानि वाले लेखों, खबरों और भाषणों के लिए मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी से जुड़े मामले। अब इस अहम जानकारी को जनता से छिपाया जा रहा है। इस तरह के फ़ैसले पारदर्शी शासन के अनुरूप नहीं हैं। RTI का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, उसे सीमित नहीं किया जाना चाहिए। @CMOTamilnadu”

क्या है पूरा मामला?

तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी करके सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से छूट दी है, क्योंकि यह एक खुफिया और सुरक्षा संगठन है। इस संबंध में मानव संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा एक सरकारी आदेश जारी किया गया और सरकारी गजट में इसकी सूचना दी गई। यह आदेश RTI अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) के तहत जारी किया गया था। पब्लिक (कानून-व्यवस्था) विभाग सांप्रदायिक और जातीय टकराव; कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर जांच आयोगों की नियुक्ति और उनकी सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई; COFEPOSA और NSA के तहत हिरासत से जुड़े सभी मामले (जिनमें हिरासत में लिए गए लोगों की अपील और उनके द्वारा या उनकी ओर से हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ याचिकाएं शामिल हैं); और मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार कानून-व्यवस्था की मासिक समीक्षा बैठकें और विशेष बैठकें आयोजित करने जैसे मामलों को देखता है।

इसमें पुलिस की गोलीबारी और पुलिस कस्टडी में मौत, पुलिस द्वारा टॉर्चर और रिमांड पर रखे गए कैदियों की मौत की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करना; लॉ एंड ऑर्डर विंग से जुड़े मामलों पर NHRC के रेफरेंस; भारत सरकार को लॉ एंड ऑर्डर और सांप्रदायिक घटनाओं पर मासिक रिपोर्ट देना; लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े मामलों पर लोकसभा और राज्यसभा के सवालों के जवाब देना; छात्रों, खेतिहर मजदूरों और राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों से निपटना; राजनीतिक कारणों, सांप्रदायिक/जातिगत टकराव, राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन और छात्र विरोध-प्रदर्शनों के आधार पर दर्ज मामलों को वापस लेने के अनुरोध; और मानहानि वाले लेखों, समाचारों और भाषणों के लिए मुकदमा चलाने की मंज़ूरी से जुड़े मामले शामिल हैं।

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