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हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के मनोनीत सांसद बने, 2032 तक रहेगा कार्यकाल, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दिलाई पद की शपथ

राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) मनोनीत सांसद बने हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (Vice President C.P. Radhakrishnan) ने अपने कक्ष में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया था।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) मनोनीत सांसद बने हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (Vice President C.P. Radhakrishnan) ने अपने कक्ष में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया था।

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बता दें कि हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। उनकी पार्टी JDU ने इस बार नाम नहीं दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका मनोनयन किया है। पूर्व CJI रंजन गोगोई (Former CJI Ranjan Gogoi) के रिटायर होने के बाद सीट खाली हुई थी। इसे भरने के लिए JD(U) के हरिवंश को चुना गया। 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे। राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति तय करते हैं। इन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।

इधर, बिहार के CM नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सांसद की शपथ ली। हरिवंश को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था, लेकिन कुछ समय से दोनों के बीच दूरी नजर आई।

पीएम मोदी ने कमबैक का दिया था हिंट

बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों का विदाई समारोह 18 मार्च को हुआ था। इस दौरान पीएम मोदी ने हरिवंश के लिए कहा था कि हमारे उपसभापति हरिवंश विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला। पीएम मोदी ने हिंट दी थी कि हरिवंश की राजनैतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है, वे आगे भी जनहित में काम करते रहेंगे। इसके आधार पर ही यह माना जा रहा है हरिवंश नारायण (Harivansh Narayan Singh)  को मनोनीत सांसद बनाकर दोबारा लाया गया है।

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अहम सवाल, अब हरिवंश राज्यसभा में किस भूमिका में होंगे?

संविधान और राज्यसभा के नियमों के अनुसार मनोनीत सांसद भी उपसभापति बन सकता है। आर्टिकल 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है। इसमें यह शर्त नहीं है कि सदस्य निर्वाचित ही होना चाहिए। यानी मनोनीत और निर्वाचित, दोनों सदस्य इस पद पर चुने जा सकते हैं। बशर्ते वह राज्यसभा सदस्य हो।

उपसभापति का चुनाव राज्यसभा सांसद करते हैं। इसके लिए प्रस्ताव लाया जाता है, जिस पर वोटिंग होती है। सरकार और विपक्ष सहमति से नाम तय करते हैं। साधारण बहुमत से चुनाव होता है। खास बात यह है कि मनोनीत सदस्य भी वोट डाल सकते हैं और उम्मीदवार बन सकते हैं। हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति (2018–2024) रह चुके हैं। अब वे राष्ट्रपति की तरफ से मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं। सहमति बनने पर वे दोबारा उपसभापति बन सकते हैं।

पत्रकारिता में थे हरिवंश, फिर राजनेता बने

हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh)  पत्रकार से नेता बने। उन्होंने जेडीयू की तरफ से राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। 2018 में पहली बार राज्यसभा के उपसभापति बने। इसके बाद 2020 में दोबारा चुने गए।

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