1. हिन्दी समाचार
  2. जीवन मंत्रा
  3. भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने माइक्रोग्रैविटी में मूंग और मेथी के बीजों का अंकुरण का किया प्रयोग, बोले- मैं बेहद उत्साहित हूं

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने माइक्रोग्रैविटी में मूंग और मेथी के बीजों का अंकुरण का किया प्रयोग, बोले- मैं बेहद उत्साहित हूं

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला (Indian astronaut Shubhanshu Shukla) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के 12 दिन पूरे कर चुके हैं। इन 10 दिनों में उन्होंने कई प्रयोग किए। प्रयोगों के क्रम में उन्होंने अपने साथ ले गए मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण किया।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला (Indian astronaut Shubhanshu Shukla) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के 12 दिन पूरे कर चुके हैं। इन 10 दिनों में उन्होंने कई प्रयोग किए। प्रयोगों के क्रम में उन्होंने अपने साथ ले गए मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण किया। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में स्प्राउट्स प्रोजेक्ट को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) अंकुरण और पौधों के शुरुआती विकास और उन पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है।

पढ़ें :- IND vs AFG 3rd ODI Live : आज अफगानिस्तान के खिलाफ क्लीन स्वीप करने उतरेगी टीम इंडिया, जानें- कब और कहां देख पाएंगे लाइव मैच

बता दें कि पृथ्वी पर स्प्राउट्स प्रोजेक्ट का नेतृत्व कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के रविकुमार होसामणि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के सुधीर सिद्धपुरेड्डी कर रहे हैं।  एक्सिओम स्पेस की ओर से इस शोध को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि पृथ्वी पर वापस आने के बाद इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा। जिससे कि उनके आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्र और पोषण प्रोफाइल में होने वाले परिवर्तनों की जांच की जा सके।

‘भारतीय वैज्ञानिकों के लिए खुलेंगे नए रास्ते’

अपने प्रयोगों को लेकर शुभांशु ने एक्सिओम स्पेस की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. लूसी लोव से बात की। इस बातचीत में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने उनके द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी और बोले की वे बेहद व्यस्त हैं। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि ‘जब से हम यहां आए हैं, तब से ही काफी व्यस्त हैं। हम अंतरिक्ष स्टेशन पर बहुत सारे प्रयोग कर रहे हैं, जिन्हें लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। इस मिशन से माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) के लिए रास्ते खुलेंगे और इससे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए नई राह खुलेगी। मुझे बेहद गर्व है कि इसरो दुनियाभर के संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।’

कई और वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे शुभांशु

पढ़ें :- UP Rain Alert : यूपी के इन जिलों में होगी मूसलाधार बारिश , 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी तेज हवाएं 

शुभांशु ने बताया कि वह कई वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें स्टेम सेल का अध्ययन, माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) में बीजों का विकास, अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाला असर आदि प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने कहा कि वे स्टेम सेल के अध्ययन वाले प्रयोग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के बीच पुल बनना मेरे लिए गर्व की बात है।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Group Captain Shubhanshu Shukla) एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4 Mission) के क्रू का हिस्सा हैं। जिसने 25 जून को नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से उड़ान भरी थी। एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4 Mission) 14 दिन का है। अपने अंतरिक्ष प्रवास को खत्म कर 10 जुलाई के बाद मौसम की स्थिति के आधार पर किसी भी दिन पृथ्वी पर वापसी कर सकते हैं। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। हालांकि नासा ने अभी तक एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4 Mission) को अंतरिक्ष स्टेशन से अलग करने की तारीख की घोषणा नहीं की है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...