1. हिन्दी समाचार
  2. पर्दाफाश
  3. ‘इंदिरा गांधी ने भारत के मछुआरों के हितों को श्रीलंका के सामने सरेंडर कर दिया…’ निशिकांत दुबे ने चुनाव के बीच उठाया कच्चाथीवू द्वीप का मुद्दा

‘इंदिरा गांधी ने भारत के मछुआरों के हितों को श्रीलंका के सामने सरेंडर कर दिया…’ निशिकांत दुबे ने चुनाव के बीच उठाया कच्चाथीवू द्वीप का मुद्दा

Katchatheevu Island Dispute : तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बीच कच्चाथीवू द्वीप के मुद्दे पर सियासत तेज हो गयी है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 के समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत के मछुआरों के हितों को श्रीलंका के सामने समर्पित कर दिया; तत्कालीन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि भी इसमें शामिल थे।

By Abhimanyu 
Updated Date

Katchatheevu Island Dispute : तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बीच कच्चाथीवू द्वीप के मुद्दे पर सियासत तेज हो गयी है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 के समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत के मछुआरों के हितों को श्रीलंका के सामने समर्पित कर दिया; तत्कालीन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि भी इसमें शामिल थे।

पढ़ें :- भारत के इतिहास में 21 मार्च का दिन बेहद है अहम, खत्म हुआ था 21 महीनों का आपातकाल

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को कच्चाथीवू द्वीप के मुद्दे पर एक्स पोस्ट किया। उन्होंने कुछ दस्तावेज़ साझा करते हुए लिखा, “कांग्रेस का काला अध्याय 7. आज यानि 23 मार्च 1976 को आपातकाल लगाकर,बिना संसद को सूचित किए इंदिरा गांधी जी ने भारत के मछुआरों का हित श्री लंका के आगे सरेंडर कर दिया। हमारे समुद्री भूभाग पर लंका की सेना का क़ब्ज़ा हो गया। इस समझौते के कारण लाखों मछुआरे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, बंगाल के जेलों में बंद हो गए। इतने पर भी कॉंग्रेस का मन नहीं भरा तो 2008 में दुबारा मनमोहन सिंह जी/ सोनिया गांधी जी की सरकार ने समझौता कर मछुआरों की ज़िंदगी तबाह कर दी। कच्चातिवू द्वीप दान देने की की कहानी नेहरु जी से शुरू होकर इंदिरा गांधी जी तक जाती है। इन सभी समझौतों और समस्याओं में तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि जी शामिल थे।

इस पोस्ट के बाद बजट सत्र के दौरान दुबे ने संसद परिसर में मीडिया से कहा, “मैंने दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं और समझौते की एक प्रति भी उपलब्ध करा दी है। इस समझौते में यह कहा गया है कि श्रीलंका को पूरे समुद्री क्षेत्र का नियंत्रण सौंप दिया गया था, जो पहले भारत के अधिकार क्षेत्र में आता था। यदि आपको इस बात की जानकारी नहीं है, तो मैं आपको वह सटीक तारीख भी बता सकता हूँ—26 जून—जिस दिन इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया था।”

उन्होंने कहा, “1976 और 1974 (कच्चाथीवू द्वीप) के समझौतों के बाद, श्रीलंका ने लाखों मछुआरों को गिरफ़्तार करना शुरू कर दिया… जब अटल बिहारी वाजपेयी ने इस बारे में कुछ करने की कोशिश की, तो उनके साथ जारी किया गया एक संयुक्त बयान भी 2008 में पलट दिया गया… तमिलनाडु की जनता को उस राजनीति का जवाब देना होगा, जो DMK कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावों में खेल रही है… नेहरू द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया को इंदिरा गांधी ने पूरा किया, और जो कुछ भी बचा था, उसे मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने पूरा किया।”

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...