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Afghanistan crisis: तालिबान पर अमेरिका के बाद IMF की गाज गिरी , अरबों के फंड पर लगाया लगाया ताला

तालिबानी क्रूरता की निशानियां समूचे विश्व को हतप्रभ कर दिया है। अफगानिस्तान पर बंदूखों के बल पर कब्जा जमाने वाले तालिबान को संपूर्ण वैश्विक विरादरी में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

वॉशिंगटन: तालिबानी क्रूरता (Taliban brutality)  की निशानियां समूचे विश्व को हतप्रभ कर दिया है। अफगानिस्तान (Afghanistan) पर बंदूखों के बल पर कब्जा जमाने वाले तालिबान को संपूर्ण वैश्विक विरादरी (entire global community)  में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। तालिबानी आतंक की खबरें पूरी मानवता को डरा रही है। अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान विश्व को भरोसा दिलाना चाहता है कि वह अफगानिस्तान में अून का शासन देगा, लेकिन तालिबाान की बातों पर सिी को विश्वास नहीं हो रहा है। अफगान पर जबरन कब्जे के बाद विश्व के देशों ने अभी तक अफगानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया है।

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अफगानिस्तान (Afghanistan) पर काबिज होने वाले तालिबान के लिए इस समय गंभीर चुनौती है अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना। चंद देशों को छोड़ दें तो यह काम तालिबान के लिए आसान नहीं है। अफगानिस्तान की नई तस्वीर यह है कि अशरफ गनी के काल में जो अंतरराष्ट्रीय मदद अफगानिस्तान को मिल रही थी, उस पर भी प्रतिबंध लगने शुरू हो गए हैं. सबसे पहले तो अमेरिका (America) के जो बाइडन प्रशासन ने 706 अरब रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी। इसके बाद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी आपातकालीन रिजर्व के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके तहत तालिबान 46 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम धनराशि का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

खबरों के मुताबिक तालिबान राज वाला अफगानिस्तान अब आईएमएफ के संसाधनों का उपयोग नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही उसे किसी तरह की नई मदद भी नहीं मिलेगी। आईएमएफ ने 460 मिलियन अमेरीकी डॉलर यानी 46 करोड़ डॉलर के आपातकालीन रिजर्व तक अफगानिस्तान की पहुंच को ब्लॉक करने की घोषणा कर दी है। आईएमएफ का कहना है कि देश पर तालिबान के नियंत्रण ने अफगानिस्तान के भविष्य के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है। ऐसे में आपातकालीन रिजर्व तक उसकी पहुंच को रोकना लाजिमी हो गया था।

खबरों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके प्रशासन के दबाव के आगे आईएमएफ ने यह फैसला किया है। गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को अमेरिका ने अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक की करीब 9.5 अरब डॉलर यानी 706 अरब रुपये से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज कर दी थी। अमेरिकी प्रशासन यही नहीं रुका है देश के पैसे को तालिबान के हाथों में जाने से रोकने के लिए अमेरिकी प्रशासन अफगानिस्तान की कैश सप्लाई भी रोक दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन और ट्रेजरी के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने खातों को फ्रीज करने का फैसला किया। अमेरिकी प्रशासन के इस कदम के तहत अमेरिका में अफगान सरकार के सेंट्रल बैंक की कोई भी संपत्ति तालिबान के लिए उपलब्ध नहीं होगी।

गौरतलब है कि रविवार को अफगानिस्तान पर तालिबान राज के बाद रूस, चीन, तुर्की और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अपने-अपने निहित स्वार्थों के कारण लचीला रवैया अपनाने के संकेत दिए हैं।

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