मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रही , अब इसकी गूंज हिंद महासागर तक पहुंच चुकी है। दोनों देशों के बीच युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है।
IRAN – US-ISRAEL WAR : मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रही—अब इसकी गूंज हिंद महासागर तक पहुंच चुकी है। दोनों देशों के बीच युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ताजा हमलों में इसी बीच ईरान ने आज हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर करीब 4,000 किलोमीटर (2500 मील) दूर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान का मध्य पूर्व से बाहर उसका पहला ज्ञात हमला प्रयास है। हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन का ज्वाइंट मिलिट्री बेस है। नाम है- डिएगो गार्सिया।
लक्ष्य तक पहुंचने में रहीं विफल
मिडिल-ईस्ट से दूर अमेरिकी ठिकाने पर यह ईरान का अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। हालांकि, दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रहीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही नष्ट हो गई, जबकि दूसरी को रोकने के लिए अमेरिकी युद्धपोत से इंटरसेप्टर मिसाइल दागी गई। यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंटरसेप्टर ने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट किया या नहीं। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ईरान ने किया पलटवार
ये हमला यूं ही नहीं हुआ। जैसे ही United Kingdom ने अमेरिका को अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी, ईरान ने पलटवार कर दिया। यानी ये सिर्फ मिसाइल नहीं थी—ये ‘पॉलिटिकल मैसेज’ था “जो हमारे खिलाफ खड़ा होगा, वो टारगेट बनेगा।”
मिसाइल क्षमता सवाल
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अपनी मिसाइल क्षमता को सीमित करने की बात कही थी। पिछले महीने भारतीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि ईरान ने अपनी मिसाइल रेंज को 2000 किलोमीटर तक सीमित कर दिया है, ताकि वह वैश्विक खतरा न बने। ऐसे में इस हमले ने उनके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेल सप्लाई प्रभावित
डिएगो गार्सिया सिर्फ एक बेस नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक की स्ट्रैटेजिक रीढ़ है। अगर यहां कुछ भी बड़ा होता, तो समुद्री व्यापार ठप। तेल सप्लाई प्रभावित। एशिया से यूरोप तक असर यानी ये हमला भले फेल हुआ हो, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ।