सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों की रुख में ईरान को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ये देश शांति और कूटनीति की वकालत कर रहे थे, वही अब वे अमेरिका पर इस बात के लिए दबाव बना रहे है कि वह ईरान की सैन्य और परमाणु शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दे।
Israel-Iran war: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध काफी भयावक होता जा रहा है। इस युद्ध के कारण दुनियाभर में संकट पैदा होने लगा है। कहीं डीजल-पेट्रोल तो कहीं रसोई गैस की किल्लत होने लगी है, जिसके कारण अब स्थिति विकराल रूप लेने लगी है। तनाव कम करने के प्रस्ताव पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि, अमेरिका और ईरान को हराना है। ऐसे में माना जा रहा है कि, ये युद्ध अब समाप्त होने वाला नहीं है।
हालांकि, इन सबके बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों की रुख में ईरान को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ये देश शांति और कूटनीति की वकालत कर रहे थे, वही अब वे अमेरिका पर इस बात के लिए दबाव बना रहे है कि वह ईरान की सैन्य और परमाणु शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दे।
इस बदलाव का मुख्य कारण ईरान द्वारा हाल ही में खाड़ी देशों के तेल क्षेत्रो और बुनियादी ढांचे पर किये गए मिसाइल और ड्रोन हमले हैं, जिससे इन देशों की सुरक्षा और अर्थ व्यवस्था को सीधा खतरा पैदा हो गया हैं। खाड़ी देशों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजराइल इस वक़्त पीछे हट जाते है, तो ईरान और भी आक्रामक होकर उभरेगा और पुरे मध्य-पूर्व की स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति को बंधक बना लेगा। वे चाहते है कि अमेरिका इस अभियान को तब तक न रोके जब तक ईरान की हमला करने की क्षमता पूरी तरह से समाप्त ना हो जाये।
रिपोर्ट-सुशील कुमार साह