दोनों जहाजों ने युद्धग्रस्त क्षेत्र के खतरनाक रास्ते, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को सुरक्षित पार किया, जिससे देश में संभावित गैस किल्लत का खतरा टल गया है। इन जहाजों के आने से भारत में रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है और सरकार ने कालाबाज़ारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
LPG crisis: ईरान इजरायल युद्ध के बीच भारत के दो बड़े गैस टैंकर हज़ारो टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस लेकर सुरक्षित भारत लौट आये हैं। जहाज ‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के ‘मुंद्रा बंदरगाह’ पर पंहुचा। यह अपने साथ लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है। इसमें से 20,000 टन मुंद्रा में उतारा जाएगा, जबकि 26,000 टन ‘मंगलुरु’ भेजा जाना निर्धारित है। दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ आज, 17 मार्च 2026 को गुजरात के ‘वाडीनार’ बंदरगाह पर पहुंच चुका है।
यह लगभग 47,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है। इसे शुरुआत में कांडला बंदरगाह जाना था, लेकिन बाद में वाडीनार की ओर मोड़ दिया गया। दोनों जहाजों ने युद्धग्रस्त क्षेत्र के खतरनाक रास्ते, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को सुरक्षित पार किया, जिससे देश में संभावित गैस किल्लत का खतरा टल गया है। इन जहाजों के आने से भारत में रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है और सरकार ने कालाबाज़ारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इन जहाजों को भारतीय नौसेना के संरक्षण में और ईरानी अधिकरियों की अनुमति के बाद सुरक्षित निकाला गया। वर्तमान में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज और लगभग 611 नाविक अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं जिनकी सुरक्षा पर सरकार नज़र रख रही हैं। इन दोनों जहाजों द्वारा लाई गई कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत की लगभग एक से डेढ़ दिन की कुल आयात आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। अकेले ‘शिवालिक’ की गैस से लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलिंडर भरे जा सकते है। इसके अतिरिक्त, कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज ‘जग लाडकी’ भी जल्द ही ‘मुंद्रा’ बंदरगाह पहुंचने वाला है।
रिपोर्ट-सुशील कुमार साह