1. हिन्दी समाचार
  2. अपराध
  3. लखनऊ बना नकली दवाओं का सप्लाई हब, अमीनाबाद-ट्रांसपोर्ट नगर तक के थोक कारोबारी जांच ,पश्चिमी यूपी से वाराणसी सक्रिय है ये नेटवर्क

लखनऊ बना नकली दवाओं का सप्लाई हब, अमीनाबाद-ट्रांसपोर्ट नगर तक के थोक कारोबारी जांच ,पश्चिमी यूपी से वाराणसी सक्रिय है ये नेटवर्क

यूपी की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र में पुलिस ने खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में नकली दवाओं के फैले नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। शुरुआती जांच में मिले संकेत के मुताबिक नकली दवाओं का यह सिंडिकेट केवल राजधानी तक सीमित नहीं, बल्कि यूपी वेस्ट से लेकर वाराणसी तक सक्रिय हो सकता है।

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र में पुलिस ने खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में नकली दवाओं के फैले नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। शुरुआती जांच में मिले संकेत के मुताबिक नकली दवाओं का यह सिंडिकेट केवल राजधानी तक सीमित नहीं, बल्कि यूपी वेस्ट से लेकर वाराणसी तक सक्रिय हो सकता है। इस नेटवर्क के तार दिल्ली, हरियाणा, कोलकाता और इंदौर जैसे अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं, जहां से फर्जी बिलों के जरिए इन दवाओं की खरीद-बिक्री की जा रही थी।

पढ़ें :- लखनऊ के 7 मॉल्स पर FSDA का बड़ा एक्शन, लुलु हाईपर मार्केट सील, कई आउटलेट्स पर कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस अब सप्लाई चेन की हर कड़ी को जोड़ रही हैं। अभी तक शरूआती जांच में सामने आया है कि लखनऊ को इस नेटवर्क ने प्रमुख वितरण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया। यहां दवाओं की खेप पहुंचने के बाद उसे आसपास के जिलों और कस्बों में भेजा जाता था। आशंका है कि कुछ थोक कारोबारियों के जरिए नकली दवाओं को असली दवाओं के साथ बाजार में खपाया जा रहा था, जिससे मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। एफएसडीए (FSDA) और पुलिस अब खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर, ट्रांसपोर्ट दस्तावेज और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य जिलों में भी कार्रवाई हो सकती है।

अमीनाबाद और ट्रांसपोर्ट नगर के कारोबारी रडार पर

बीकेटी में हुई कार्रवाई के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया है। शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर अमीनाबाद और ट्रांसपोर्ट नगर के कुछ थोक दवा कारोबारियों की भूमिका जांच के घेरे में आई है। अधिकारियों का मानना है कि मामला केवल एक खेप तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे संगठित सप्लाई नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी कई परतें अभी खुलनी बाकी हैं।

कूरियर कंपनी से भी पूछताछ

पढ़ें :- यूपी में मिलावटखोरों के फोटो होर्डिंग्स लगाकर जन सामान्य को जागरूक करेगी योगी सरकार, जिलाधिकारियों को पत्र जारी

गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम अब दवाओं की खरीद-बिक्री, बिलिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि नकली दवाएं कहां तैयार हुईं और किन माध्यमों से राजधानी तक पहुंचीं। कूरियर कंपनी से भी पूछताछ जारी है। बुकिंग कराने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि किन थोक कारोबारियों के जरिए इन दवाओं को बाजार में उतारने की तैयारी थी।

कई बड़े खुलासों के संकेत

एफएसडीए (FSDA)  की नजर अब उन प्रतिष्ठानों पर भी है, जहां हाल के महीनों में संदिग्ध तरीके से बड़ी मात्रा में दवाओं की खरीद या बिक्री हुई है। अधिकारियों का मानना है कि सप्लाई चेन की हर कड़ी सामने आने पर नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर छापेमारी और दस्तावेजों की विस्तृत जांच भी की जाएगी।

जांच का एक अहम पहलू नकली दवाओं में इस्तेमाल किए गए ब्रांड, पैकेजिंग और बैच नंबरों की पड़ताल भी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऐसी दवाएं बाजार में कितनी मात्रा में पहुंच चुकी हैं। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता मिलती है तो संबंधित लाइसेंस धारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सीधे लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में सप्लाई चेन की हर कड़ी तक पहुंचना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

पढ़ें :- भ्रष्टाचार पर CM योगी का बड़ा एक्शन: रामपुर के सहायक आयुक्त, राज्य कर खण्ड-01 को किया सस्पेंड

एफएसडीए के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार (Brajesh Kumar, Assistant Commissioner, FSDA) ने कहा कि नकली दवाओं के कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए पूरे नेटवर्क की तलाश की जा रही है। कई थोक कारोबारी जांच के दायरे में हैं। जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी और इस कारोबार से जुड़े लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

आगरा इस सिंडिकेट का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब (Dr. Roshan Jacob, FSDA Commissioner) के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...