शिव पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों में रूद्राक्ष की अपार महिमा बतायी गई है। सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव का महाप्रसाद माना जाता है।
Mahashivratri 2026 Rudraksha : शिव पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों में रूद्राक्ष की अपार महिमा बतायी गई है। सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव का महाप्रसाद माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि रुद्राक्ष भक्त की साधना और तप में बल और तेज का प्रभाव बढ़ता जाता है। मान्यता के अनुसार, यह भगवान शिव के अश्रु से उत्पन्न हुआ है। यह अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष प्रदान करने में शक्तिशाली है। शिवपुराण, पद्मपुराण, रुद्राक्षकल्प, रुद्राक्ष महात्म्य आदि ग्रंथों में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया गया है। रुद्राक्ष के दर्शन, स्पर्श और जप से भी पुण्य प्राप्त होता है। यदि आप महादेव के इस पावरफुल मनके को महाशिवरात्रि पर धारण करने की सोच रहे हैं तो आपको इससे जुड़े जरूरी नियम, धार्मिक लाभ और ज्योतिष उपाय जरूर जानने चाहिए।
यदि आप महाशिवरात्रि पर रुद्राक्ष को धारण करना चाहते हैं तो सबसे पहले किसी जानकार व्यक्ति के माध्यम से बाजार से सही रुद्राक्ष खरीद कर लाएं।
रुद्राक्ष को खरीदने और धारण करने से पहले किसी ज्योतिषी या विशेषज्ञ से अपने लिए उचित मुखी वाले रुद्राक्ष की राय जरूर ले लें।
महाशिवरात्रि वाले दिन निशीथ काल में तन और मन से पवित्र होकर रुद्राक्ष को सबसे पहले गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उसे घर या मंदिर में शिवलिंग के पास रख दें। इसके बाद भगवान शिव और रुद्राक्ष की पुष्प, चंदन, रोली, अक्षत, धूप-दीप आदि से पूजा करें और महादेव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
महादेव के मंत्र से अभिमंत्रित करने के बाद उस रुद्राक्ष को भगवान शिव का महाप्रसाद मानते हुए लाल रंग या फिर सफेद रंग के धागे में पिरोकर अपने गले, बाजु या कलाई पर धारण करें।