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TMC सांसदों को जबरन हटाने पर ममता बनर्जी हुईं आगबबूला, बोलीं- चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून लागू करना नहीं

West Bengal Politics: कोलकाता में I-PAC के ऑफिस पर ईडी की रेड के खिलाफ टीएमसी सांसदों ने दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन, सुरक्षाकर्मियों ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को हिरासत में ले लिया। इस दौरान सुरक्षाकर्मी सांसदों को टांगकर ले जाते दिखे। जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

By Abhimanyu 
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West Bengal Politics: कोलकाता में I-PAC के ऑफिस पर ईडी की रेड के खिलाफ टीएमसी सांसदों ने दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन, सुरक्षाकर्मियों ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को हिरासत में ले लिया। इस दौरान सुरक्षाकर्मी सांसदों को टांगकर ले जाते दिखे। जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

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टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “मैं हमारे सांसदों के साथ किए गए शर्मनाक और गलत बर्ताव की कड़ी निंदा करती हूं। गृह मंत्री के ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून लागू करना नहीं है – यह वर्दी में घमंड है। यह लोकतंत्र है, बीजेपी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं।”

सीएम ममता ने आगे लिखा, “लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता। जब बीजेपी नेता विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो वे रेड कार्पेट और खास सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। जब विपक्षी सांसद अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें घसीटा जाता है, हिरासत में लिया जाता है और अपमानित किया जाता है। यह दोहरा मापदंड बीजेपी के लोकतंत्र के विचार को दिखाता है – आज्ञाकारिता, विरोध नहीं।”

उन्होंने लिखा, “यह साफ हो जाना चाहिए: सम्मान आपसी होता है। आप हमारा सम्मान करेंगे, हम आपका सम्मान करेंगे। आप हमें सड़क पर घसीटेंगे, और हम आपको सहिष्णुता, असहमति और लोकतांत्रिक नैतिकता के संवैधानिक विचार पर वापस लाएंगे। यह हमारा भारत है। हम अधिकार से नागरिक हैं, किसी कुर्सी, बैज या सत्ता की स्थिति की दया पर नहीं। कोई भी सरकार, कोई भी पार्टी और कोई भी गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में कौन गरिमा का हकदार है।”

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