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मथुरा नाव हादसे में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत, नाव पलटने का ​Video सोशल मीडिया में वायरल

हादसे के बाद से ही राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। आर्मी, एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय गोताखोरों सहित करीब 250 लोगों की टीम यमुना नदी में 14 किलोमीटर के दायरे में लापता लोगों की तलाश कर रही है। अब तक 22 लोगों को रेस्कयू कर बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं..

By हर्ष गौतम 
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मथुरा/ वृंदावन :  मथुरा में यमुना नदी में शुक्रवार को हुए भीषण नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 11 पर्यटकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। हादसे के बाद से ही राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। आर्मी, एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय गोताखोरों सहित करीब 250 लोगों की टीम यमुना नदी में 14 किलोमीटर के दायरे में लापता लोगों की तलाश कर रही है। अब तक 22 लोगों को रेस्कयू कर बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद सोशल मीडिया में दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहें है। एक वीडियों में श्रद्धालु राधे—राधे जप रहें है। और दूसरे वीडियो नाव पलटने के बाद की है।

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तेज बहाव और गाद बनी सबसे बड़ी चुनौती

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रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अधिकारियों के मुताबिक, यमुना नदी का तेज बहाव राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। आशंका जताई जा रही है कि लापता लोग बहकर काफी दूर जा सकते हैं। इसके अलावा नदी के भीतर मौजूद गाद (कीचड़) और रेत में शव दब जाने की संभावना भी जताई गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कई बार 24 घंटे बाद शव पानी में फूलकर ऊपर आ जाते हैं, इसलिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।

केसी घाट पर पलटी थी नाव, 37 लोग थे सवार

यह हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट पर हुआ, जो प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित है। नाव में कुल 37 श्रद्धालु सवार थे, जो अचानक असंतुलित होकर पलट गई। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां यमुना नदी की गहराई करीब 25 फीट बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नाव की क्षमता 40 लोगों की थी, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। नाव में किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। हादसे के वक्त पास में मौजूद पांटून पुल की मरम्मत कर रहे मजदूरों और अन्य नाविकों ने कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की, जिसके बाद प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं।

 

हादसे का कारण: तेज हवा और नाविक की लापरवाही

हादसे में बचे एक युवक ने बताया कि नाव जब तट से करीब 50 फीट दूर थी, उसी समय करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने लगी। हवा के झोंकों से नाव डगमगाने लगी और नाविक का नियंत्रण छूट गया। यात्रियों ने नाविक को कई बार चेतावनी दी कि आगे पुल आ रहा है, नाव रोक ले, लेकिन उसने उनकी बात अनसुनी कर दी। नाव दो बार पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर के बाद संतुलन बिगड़ गया और नाव डूब गई।

एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत

इस हादसे में सबसे दुखद पहलू यह रहा कि मृतकों में एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं। इनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे करीबी रिश्तेदार शामिल हैं। मृतकों की पहचान मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी के रूप में हुई है।

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आरोपी नाविक गिरफ्तार

पुलिस ने हादसे के करीब 6 घंटे बाद आरोपी नाविक पप्पू निषाद को हिरासत में ले लिया। यह नाव उसी की बताई जा रही है। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पकड़ लिया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है और लापरवाही के अन्य पहलुओं की जांच भी जारी है।

जानकारी के अनुसार, यह सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना जिले के जगराओं क्षेत्र से आए थे। श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से दो बसों में करीब 130 श्रद्धालुओं का समूह वृंदावन की चार दिन की यात्रा पर आया था। इनमें से कई लोग इस नाव में सवार थे।

प्रशासन पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना लाइफ जैकेट और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के श्रद्धालुओं को नाव में बैठने की अनुमति कैसे दी गई।

भक्ति और आस्था से भरी यह यात्रा कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। जो श्रद्धालु दर्शन के लिए आए थे, उनके परिवार अब अपनों की तलाश और दुख में डूबे हुए हैं। पूरा इलाका शोक में है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।

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