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मुस्लिम लीग ने सीएए कानून के खिलाफ SC में याचिका दायर कर रोक लगाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सीएए कानून (CAA Law) के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)  की तरफ से दायर की गई है, जिसमें कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में नागरिकता संशोधन कानून 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) के प्रावधानों को देश में लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सीएए कानून (CAA Law) के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)  की तरफ से दायर की गई है, जिसमें कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में नागरिकता संशोधन कानून 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) के प्रावधानों को देश में लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) के तहत कुछ धर्मों के लोगों को ही नागरिकता दी जाएगी, जो संविधान के खिलाफ है।

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याचिका में मुस्लिम लीग ये तर्क देते हुए सीएए कानून लागू करने पर रोक की मांग की

केंद्र सरकार ने सोमवार को ही सीएए कानून (CAA Law)  लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। गौरतलब है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने सीएए को चुनौती देते हुए रिट याचिका भी दायर की थी। आईयूएमएल (IUML) ने सीएए के खिलाफ दायर अपनी रिट याचिका में अंतरिम आवेदन दिया, जिसमें आईयूएमएल (IUML) ने तर्क दिया कि किसी कानून की संवैधानिकता तब तक लागू नहीं होगी, जब तक कानून स्पष्ट तौर पर मनमाना हो।

सीएए कानून का क्यों हो रहा है विरोध?

सीएए कानून (CAA Law) के तहत भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक तौर पर प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई वर्ग के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। सीएए (CAA) में किसी की नागरिकता छीनने का प्रावधान है। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कानून उनके साथ भेदभाव करता है, जो देश के संविधान का उल्लंघन है।

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