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Muslim Vote Bank : सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, बोले- 1 लाख रुपये दे दूंगा तब भी मुसलमान मुझे नहीं देगा वोट

असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) ने मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) पर बड़ा बयान दिया है। असम CM ने कहा कि राज्य में वोट विचारधारा से तय होते हैं, योजनाओं से नहीं। उन्होंने मिया मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) पर कहा कि 10 हजार क्या, 1 लाख रुपये दूंगा तब भी मुसलमान मुझे वोट नहीं देगा।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली: असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) ने मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) पर बड़ा बयान दिया है। असम CM ने कहा कि राज्य में वोट विचारधारा से तय होते हैं, योजनाओं से नहीं। उन्होंने मिया मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) पर कहा कि 10 हजार क्या, 1 लाख रुपये दूंगा तब भी मुसलमान मुझे वोट नहीं देगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) ने साफ कहा कि राज्य में वोटिंग केवल सरकारी योजनाओं या आर्थिक सहायता पर निर्भर नहीं करती। उनके अनुसार, असम में कई समुदाय ऐसे हैं, जिनकी राजनीतिक पसंद पैसे या सुविधाओं से नहीं बदलती।

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निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे बिहार की तरह महिलाओं को नकद सहायता देने की योजना ला सकते हैं तो उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया। सरमा ने कहा कि असम के कुछ समुदाय उनके काम की सराहना तो करते हैं, लेकिन मतदान के समय उनकी तरफ नहीं आते। उन्होंने कहा कि राज्य में मतदान के रुझान सरकारी योजनाओं या वित्तीय प्रोत्साहनों के बजाय विचारधारा से प्रभावित होते हैं। चाहे कितना भी पैसा दिया जाए, चाहे 10,000 रुपये हों या 1 लाख रुपये, कोई भी मुस्लिम मतदाता उन्हें अपना वोट नहीं देगा।

असम में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता

चर्चा के दौरान सरमा ने राज्य में तेजी से बदलती आबादी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्षों से जारी अवैध प्रवासन ने जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित किया है। सरमा ने बताया कि असम की मुस्लिम आबादी 2021 में करीब 38 फीसदी थी। 1961 से हर दशक में 4–5 फीसदी की लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2027 तक यह अनुपात 40 फीसदी तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर यह प्रतिशत 50 फीसदी पार कर गया तो राज्य के अन्य समुदायों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत दबाव में आ सकती है।

रिश्ते अच्छे हैं पर वोट नहीं मिलते

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सरमा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत संबंध मिया समुदाय की महिलाओं और कई मुस्लिम परिवारों से अच्छा है, लेकिन चुनाव के समय यह व्यवहारिक जुड़ाव वोट में तब्दील नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुस्लिम वोट कांग्रेस के साथ भी चले जाएं, तब भी भाजपा असम में अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखने में सक्षम है।

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